फिरोजाबाद। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदगी वाली स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस पर हुए पथराव के मामले का पुलिस ने 15 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया। जांच में सामने आया कि ट्रेन पर पत्थर फेंकने वाले कोई आतंकी या संगठित गिरोह के सदस्य नहीं, बल्कि रेलवे ट्रैक के किनारे कूड़ा बीन रहे तीन किशोर थे। पुलिस ने दो बाल अपचारियों को हिरासत में ले लिया है, जबकि तीसरे की तलाश जारी है। गुरुवार शाम पेमेश्वर गेट के पास स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस के ई-1 कोच पर पत्थर लगने से खिड़की का शीशा टूट गया था। इसी कोच में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत यात्रा कर रहे थे। घटना के बाद रेलवे, जीआरपी और स्थानीय पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीजी आगरा, डीआईजी, डीएम और एसएसपी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।
घटना के खुलासे के लिए रसूलपुर, दक्षिण, लाइनपार, जीआरपी, एसओजी और सर्विलांस समेत 10 पुलिस टीमों को लगाया गया। पुलिस ने 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और स्थानीय स्तर पर की गई पूछताछ के आधार पर तीन किशोरों की पहचान की। जांच में पता चला कि तीनों किशोर रेलवे ट्रैक के आसपास कूड़ा बीन रहे थे। इसी दौरान उन्होंने ट्रैक किनारे पड़े पत्थरों को उठाकर गुजर रही ट्रेन पर फेंक दिया। पत्थर ई-1 कोच के शीशे से टकराया, जिससे वह टूट गया और यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई।
शुक्रवार सुबह पुलिस ने आसफाबाद फाटक के पास से दो बाल अपचारियों को हिरासत में ले लिया। पुलिस के अनुसार दोनों किशोर पूर्व में भी चोरी और रेलवे अधिनियम से जुड़े मामलों में चिन्हित रहे हैं। तीसरे बाल अपचारी की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पकड़े गए बाल अपचारियों के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम के तहत विधिक कार्रवाई की जा रही है। इस घटना ने रेलवे ट्रैक के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और असामाजिक गतिविधियों पर निगरानी को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।





