कहानी : सोशल मीडिया वाली लाइफ
नेहा बी.टेक कर चुकी थी और नौकरी के लिए कोशिश कर रही थी, वहीं उसकी सहेली कामिनी एक कॉलेज में […]
ग़ज़ल
जिस मोती में आब नहींतो फिर वो नायाब नहीं जीवन उसका क्या जीवनजिस के कोई ख्वाब नहीं उसको गुलशन कहना […]
फ़ना
तुम्हारे बारे में जब लिखने बैठता हूँ। तब मेरे सामने बस एक चेहरा नहीं एक पूरा ब्रह्मांड खुल जाता है। […]
ग़ज़ल
हवा दिन की विषैली हो रही है नगर की शाम मैली हो रही है प्रदूषण दायरे में आ रहे सब […]
“तीन पुरानी कमीजें”
“अपना ध्यान रखा कर बेटा, समय पर खाना खा लिया कर। तेरे बारे में सोचती रहती हूँ, रात को नींद […]
जंगल
हम मनुष्य सुनने को उतने आतुर नहीं हैंजितनी आतुरता से जंगल अपनी बात हमसे कहना चाहते हैंवे हमारी प्रतीक्षा कर […]
ग़ज़ल
बहुत सच्चा, ज़रा झूठा नहीं हैकभी यूँ बे-सुकूं रहता नहीं है भला तारीफ़ उसकी क्यूँ करें सबकहीं कुछ भी अगर […]
तितली के पंखों पर : स्त्री-अस्मिता, आस्था और आत्मानुभूति की उज्ज्वल यात्रा
शिक्षा सदन इंटर कॉलेज मेहवडकलां,रुड़की जनपद-हरिद्वार की प्रख्यात हिन्दी शिक्षिका एवं साहित्य साधिका डॉ. मेनका त्रिपाठी की कृति “तितली के […]
जीवन मधुर गीत है
जीवन मधुर गीत है, सुमधुर संगीत है। ये है माँ की मीठी लोरी में, बाबा के चुप जज़्बातों में। प्रिय […]
‘शिकस्त’—एक उपन्यास नहीं, एक वैचारिक यात्रा
किसी भी समाज की आत्मा उसके साहित्य में बसती है, और साहित्य की प्रामाणिकता उस संवेदना में, जो जीवन की […]




