ज़ख्म दिलपर है लगा कुछ तो करो
है सियासी पैतरा कुछ तो करो
अब नहीं है कुछ बचा कुछ तो करो
आ गया है ज़लज़ला कुछ तो करो
फैसला लो अब ज़रा कुछ तो करो
गर मिटाना फासला कुछ तो करो
बद सियासत हो रही है आजकल
चुप न बैठो अब ज़रा कुछ तो करो
ना समझ बनना नहीं है ठीक अब
सब समझमें आ गया कुछ तो करो
– हमीद कानपुरी