जीवन मधुर गीत है,
सुमधुर संगीत है।
ये है माँ की मीठी लोरी में,
बाबा के चुप जज़्बातों में।
प्रिय के सुरभित उच्छवासों में,
बच्चों की प्यारी बातों में।
ये सजता आस भरोसों में,
ये है नदियों की कल-कल में,
बारिश की प्यारी रिमझिम में,
भंवरों के मधुमय गुंजन में।
श्वासों की सुंदर सरगम में,
झरनों की मीठी रुनझुन में।
चिड़ियों की प्यारी कलरव में,
कोयल के कूजित गीतों में।
पर सुनने को इन गीतों को
मन दूषित खोना होगा।
सरल चित्त होना होगा।
प्रकृति राग रमना होगा।
╰┈➤पूर्णिमा बेदार श्रीवास्तव
लखनऊ, उत्तर प्रदेश




