राजीव रंजन नाग: नई दिल्ली। 16 फरवरी को नई दिल्ली में शुरू हुए बहुचर्चित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के पहले दिन आयोजन स्थल पर गंभीर अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं। इन व्यवस्थागत कमियों को लेकर सोशल मीडिया पर शिकायतों की बाढ़ आ गई, जिसके बाद केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने माफ़ी मांगी।
समिट में शामिल प्रतिभागियों ने बताया कि प्रवेश द्वार पर अलग-अलग सुरक्षा जांच चौकियों और अन्य बाधाओं को पार करने में उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जबकि वीआईपी मेहमान लंबी और घुमावदार कतारों से अपेक्षाकृत जल्दी निकल गए। कई लोगों ने 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी वाले इस बड़े आयोजन में संगठनात्मक कमियों और अपर्याप्त योजना की आलोचना की। ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाला यह पहला एआई समिट है, इसलिए इसे विशेष महत्व दिया जा रहा है। इससे पहले दो एआई समिट यूनाइटेड किंगडम और दक्षिण कोरिया में आयोजित किए जा चुके हैं।
खराब भीड़ प्रबंधन से नाराज़ प्रतिभागियों के सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, कई प्रदर्शक और स्टार्टअप संस्थापक आयोजन स्थल के बाहर ही फंसे रहे, क्योंकि प्रधानमंत्री के आगमन से पहले सुरक्षा कारणों से मुख्य हॉल को बंद कर दिया गया था। एआई वॉइस स्टार्टअप ‘बोलना’ के सह-संस्थापक मैत्रेय वाघ ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “गेट बंद थे, इसलिए मैं एआई समिट में अपने बूथ तक नहीं पहुंच सका। अगर आप भी बाहर फंसे हैं और बोलना टीम से मिलना चाहते हैं, तो मुझे संदेश भेजें।”
एक अन्य उपयोगकर्ता ने आयोजन स्थल पर प्रतिबंधित वस्तुओं की सूची साझा करते हुए सवाल उठाया कि बैग, कार की चाबियां और पानी जैसी बुनियादी वस्तुओं के बिना कोई व्यक्ति समिट में कैसे भाग ले सकता है।
कार्यक्रम के दौरान बैठने की पर्याप्त व्यवस्था न होना, वाई-फाई सुविधा का अभाव और डिजिटल भुगतान की व्यवस्था न होना भी प्रमुख समस्याएं रहीं। केवल नकद भुगतान स्वीकार करने वाले स्टॉल होने के कारण कई प्रतिभागियों को भोजन और पानी तक नहीं मिल पाया। कुछ प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि स्पष्ट निर्देशों के अभाव में वे अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामान वापस नहीं ले सके। समिट को कवर कर रहे पत्रकारों ने भी डिजिटल क्यूआर कोड और भौतिक पास को लेकर भ्रम की स्थिति की शिकायत की। कई लोगों ने पंजीकरण प्रणाली के बार-बार ठप होने का भी आरोप लगाया।
इवेंट के दौरान चोरी की घटना के आरोप भी सामने आए। एआई स्टार्टअप ‘नियोसैपियंस’ के संस्थापक धनंजय यादव ने दावा किया कि प्रधानमंत्री के आगमन से पहले मुख्य हॉल खाली कराए जाने के दौरान उनकी कंपनी के एआई वियरेबल उपकरण चोरी हो गए। एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट में उन्होंने लिखा, “दोपहर 12 बजे सुरक्षा कर्मी प्रधानमंत्री के दोपहर 2 बजे आने से पहले क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए पहुंचे। मैंने बताया कि हम NeoSapien में भारत का पहला पेटेंटेड एआई वियरेबल बना रहे हैं और उसे प्रदर्शित करने का अवसर मांगा। एक अधिकारी ने मुझे रुकने की अनुमति दी, लेकिन कुछ देर बाद दूसरे समूह ने तुरंत स्थान खाली करने का आदेश दे दिया। ऐसा लगा कि सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी थी।
मैंने पूछा कि क्या हमें अपने वियरेबल उपकरण साथ ले जाने चाहिए? जवाब मिला कि अन्य लोग अपने लैपटॉप भी यहीं छोड़ रहे हैं, सुरक्षा कर्मी ध्यान रखेंगे। उन पर भरोसा कर मैं चला गया। बाद में पता चला कि हमारे उपकरण चोरी हो गए थे। गेट दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक बंद रहे, जो अपेक्षा से कहीं अधिक समय था।”
इन सभी अव्यवस्थाओं को लेकर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खेद व्यक्त करते हुए माफ़ी मांगी और आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी कमियां दोबारा न हों, इसके लिए आवश्यक सुधार किए जाएंगे।





