राजीव रंजन नाग: नई दिल्ली। कांग्रेस की महिला सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर उनके खिलाफ लगाए गए बेबुनियाद और बदनाम करने वाले आरोपों पर दुख जताया है। सांसदों का कहना है कि ये आरोप सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के दबाव में लगाए गए हैं।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 5 फरवरी को सदन में दावा किया था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने के लिए सदन में न आने की सलाह दी थी, क्योंकि उन्हें जानकारी मिली थी कि कांग्रेस की महिला सांसद स्पीकर की कुर्सी के चारों ओर जमा हो गई थीं और कोई भी अनहोनी हो सकती थी।
बिरला ने कहा था, “इसके बाद जब प्रधानमंत्री को बोलना था, तो मुझे जानकारी मिली कि कांग्रेस सांसदों से कोई भी अनहोनी हो सकती थी। अगर ऐसा होता तो इससे देश का लोकतांत्रिक ढांचा बिखर जाता। इसीलिए मैंने उन्हें सदन में न आने की सलाह दी।”
उन्होंने बाद में कहा था, “देश ने देखा है कि महिला सांसद प्रधानमंत्री की कुर्सी तक कैसे पहुंच गईं। यह जरूरी नहीं था और संसद की गरिमा के खिलाफ था।”
अपने बयान में महिला सांसदों ने कहा कि स्पीकर बिरला लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने का अधिकार न देकर, इंडिया गठबंधन के सांसदों को निलंबित करके और एक भाजपा सांसद को गंदी व आपत्तिजनक बातें करने की अनुमति देकर संसदीय परंपराओं की रक्षा करने में असफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री विरोध की वजह से नहीं, बल्कि डर की वजह से लोकसभा से दूर रहे।
महिला सांसदों ने स्पीकर से बिना किसी भेदभाव के निष्पक्षता के साथ कार्य करने की अपील की है। पत्र पर एस. जोथिमणि, सुधा रामकृष्णन, प्रियंका गांधी, वर्षा गायकवाड़, ज्योत्सना महंत और गेनीबेन ठाकोर के हस्ताक्षर हैं।
महिला सांसदों ने पत्र में लिखा कि “हम यह पत्र गहरी पीड़ा और संवैधानिक जिम्मेदारी की मजबूत भावना के साथ लिख रहे हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोकसभा के माननीय स्पीकर और इस सम्मानित सदन के संवैधानिक संरक्षक होने के नाते आपसे सत्ताधारी पार्टी ने विपक्ष की महिला सांसदों, विशेषकर इंडियन नेशनल कांग्रेस की सांसदों के खिलाफ झूठे, बेबुनियाद और बदनाम करने वाले आरोप लगवाए।”
उन्होंने कहा कि स्पीकर की कुर्सी एक संवैधानिक पद है, जिसका उद्देश्य संसद की गरिमा की रक्षा करना, निष्पक्षता सुनिश्चित करना और सभी सदस्यों के अधिकारों की सुरक्षा करना है, चाहे वे किसी भी दल से हों। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान स्थापित संसदीय परंपरा के अनुसार सत्ताधारी पक्ष और विपक्ष दोनों को बोलने का अवसर दिया जाता है, जिसके बाद प्रधानमंत्री जवाब देते हैं। इसके बावजूद पिछले चार दिनों से विपक्ष के नेता राहुल गांधी को जानबूझकर बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा है, जो पहले कभी नहीं हुआ और इसका कोई औचित्य नहीं है।
पत्र में यह भी कहा गया कि दूसरी ओर, सत्ताधारी पार्टी के कहने पर इंडिया गठबंधन के आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया, जबकि एक भाजपा सांसद को पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ भद्दी और गंदी टिप्पणियां करने की अनुमति दी गई। जब महिला सांसदों ने इस मुद्दे पर स्पीकर से मुलाकात कर न्याय की मांग की, तो उन्होंने माना कि एक बड़ी गलती हुई है और शाम चार बजे दोबारा आने को कहा। पुनः मिलने पर उन्होंने कहा कि वह इस मामले में सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे हैं, जिससे यह प्रतीत होता है कि अब ऐसे मामलों में निर्णय लेने की स्वतंत्रता स्पीकर के पास नहीं रही है। यह स्पीकर के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इसके बाद शाम पांच बजे प्रधानमंत्री को लोकसभा में बोलना था। इंडिया गठबंधन के सभी सदस्य विरोध में खड़े हो गए, लेकिन प्रधानमंत्री सदन में नहीं आए। अगले दिन सत्ताधारी पार्टी के दबाव में प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति का बचाव करने के लिए स्पीकर द्वारा जारी बयान में कांग्रेस की महिला सांसदों पर गंभीर आरोप लगाए गए। सांसदों ने कहा कि उनका विरोध प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संसदीय नियमों के दायरे में रहा है।
महिला सांसदों ने कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा दशकों की मेहनत से बनी है, जिसमें उन्हें अक्सर विरोध और भेदभाव का सामना करना पड़ा है। उनकी ईमानदारी पर सवाल उठाना सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हर महिला पर हमला है।
उन्होंने कहा कि उन्हें सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रही हैं और जवाबदेही की मांग कर रही हैं। प्रधानमंत्री की सदन से अनुपस्थिति किसी धमकी के कारण नहीं, बल्कि डर का परिणाम थी। विपक्ष का सामना करने का साहस उनमें नहीं था।
महिला सांसदों ने स्पष्ट किया कि वे इंडियन नेशनल कांग्रेस की सांसद हैं, जो प्रेम, शांति, संवैधानिक मूल्यों और मानवीय गरिमा में विश्वास रखने वाली पार्टी है। वे हिंसा या धमकी में विश्वास नहीं करतीं और चुनी हुई बहादुर महिला प्रतिनिधि हैं, जिन्हें चुप नहीं कराया जा सकता।
अंत में उन्होंने कहा कि यह साफ दिखाई देता है कि स्पीकर सत्ताधारी पार्टी के निरंतर दबाव में हैं। उन्होंने आग्रह किया कि स्पीकर लोकसभा के निष्पक्ष संरक्षक के रूप में कार्य करें, ताकि इतिहास उन्हें ऐसे व्यक्ति के रूप में याद न रखे, जिसने संवैधानिक सिद्धांतों को कमजोर करने वालों के दबाव में झुकने का काम किया।










