अँधेरों में उजाला आदमी हूँ
नज़ारों का नज़ारा आदमी हूँ
सभी पहचानते हैं अच्छी तरह से
ज़माने में निराला आदमी हूँ
नहीं मुझमें कोई भी ख़ासियत है
कहा किसने कि आला आदमी हूँ
ख़ुदा ख़ुद है सहारा, जानते सब
नहीं मैं बे-सहारा आदमी हूँ
शरीफ़ों में शराफ़त से रहूँ, पर
शरारों में शरारा आदमी हूँ
—> हमीद कानपुरी
(अब्दुल हमीद इदरीसी)
मीरपुर कैंट, कानपुर




