लेकर बड़े सवाल वो रण में उतर गया
उसका जुनून पल में बड़े काम कर गया
साहस बड़े-बड़े वो सनकपन में कर गया
लेकिन हमीद होश में सब कुछ बिखर गया
जिस रोज़ जोरदार जवाब इक मिला उसे
मगरूर का नशा वहाँ पल में उतर गया
उसको यक़ीन जानिये मुझ से है काम कुछ
यूँ आ के मेरे पास वो फूलों सा झर गया
सब मसअले समाप्त उसी दिन से हो गये
अपनी अना को मार के जिस दिन वो घर गया
— हमीद कानपुरी
अब्दुल हमीद इदरीसी, कानपुर




