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‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ में उत्तर प्रदेश की प्रभावशाली प्रगति

⇒ रिकॉर्ड स्क्रीनिंग से बना अग्रणी मॉडल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में संचालित 100 दिवसीय ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ ने महज 42 दिनों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज करते हुए टीबी उन्मूलन की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया है। व्यापक स्क्रीनिंग, आधुनिक तकनीकी हस्तक्षेप और जनभागीदारी के माध्यम से प्रदेश इस अभियान में एक अग्रणी मॉडल के रूप में उभर रहा है। अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा अमित कुमार घोष ने अभियान की समीक्षा के दौरान बताया कि प्रदेश प्रधानमंत्री के ‘टीबी मुक्त भारत’ संकल्प को साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने अब तक की उपलब्धियों को उत्साहजनक बताते हुए अभियान को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

अभियान के तहत बीते 42 दिनों में 15,03,112 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिसमें केवल 4 मई को 45,810 लोगों की जांच शामिल है। उच्च जोखिम वाले गांवों, शहरी वार्डों और झुग्गी-बस्तियों में ‘आयुष्मान आरोग्य शिविरों’ के माध्यम से सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। जांच सुविधाओं को सुदृढ़ करते हुए प्रदेश में अब तक 10,17,992 एक्स-रे किए गए हैं, जिनमें 4 मई को ही 34,550 एक्स-रे शामिल हैं। प्रदेश में उपलब्ध 989 एक्स-रे मशीनों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है और लक्ष्य के सापेक्ष लगभग 46 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की गई है।

मॉलिक्यूलर जांच के क्षेत्र में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। 578 एनएएटी मशीनों के माध्यम से अब तक 2,76,446 जांचें की गई हैं, जिनमें से 2,21,698 जांच प्रभावी रूप से दर्ज की गई हैं, जो लगभग 86.6 प्रतिशत उपयोगिता को दर्शाती हैं। टीबी मरीजों की पहचान और उपचार में भी तेजी आई है। अब तक 68,273 मरीजों का नोटिफिकेशन किया गया है, जबकि 28,763 मरीजों का ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी के लिए आकलन किया गया है। रोकथाम के तहत 1,24,633 संभावित संपर्कों की पहचान कर 72,285 को टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट प्रदान किया गया है।

प्रदेश में अब तक 26,722 उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर 7,359 आयुष्मान आरोग्य शिविर आयोजित किए गए हैं। इन शिविरों में टीबी जांच के साथ ही हीमोग्लोबिन, रक्तचाप और मधुमेह जैसी अन्य स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी जांच और स्क्रीनिंग से संबंधित डेटा को रियल-टाइम में ‘निक्षय पोर्टल’ पर अपलोड किया जाए, ताकि पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित हो सके। साथ ही जिन क्षेत्रों में प्रगति धीमी है, वहां माइक्रोप्लान को मजबूत करने और जनजागरूकता बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों से इस अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार और समाज के संयुक्त प्रयासों से उत्तर प्रदेश टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को समय से पहले प्राप्त कर देश के लिए एक आदर्श मॉडल बनेगा।

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