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बुद्धिमान पुस्तक छँटाई एवं पुस्तकालय प्रबंधन प्रणाली का डिज़ाइन पंजीकृत

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के शोधकर्ताओं ने शैक्षणिक एवं तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय की प्रो. शिल्पी वर्मा, विक्रांत दुबे, राजीव रंजन मिश्रा एवं वीरेंद्र कुमार ने शारदा विश्वविद्यालय, आगरा के डॉ. पंकज कुमार देधा तथा अग्रवान हेरिटेज विश्वविद्यालय, आगरा की डॉ. रंजना यादव के साथ संयुक्त रूप से विकसित अपने नवोन्मेषी डिज़ाइन ‘स्वचालित उपकरण द्वारा बुद्धिमान पुस्तक छँटाई एवं कुशल पुस्तकालय प्रबंधन प्रणाली’ को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से आधिकारिक डिज़ाइन पंजीकरण प्राप्त हुआ है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि की सफल पूर्ति बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के अनुसंधान-उन्मुख शैक्षणिक वातावरण में, माननीय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल के दूरदर्शी नेतृत्व एवं सतत प्रेरणा के अंतर्गत संभव हो सकी। नवाचार, अंतः विषयक अनुसंधान तथा बौद्धिक संपदा सृजन को प्रोत्साहन देने की उनकी नीति ने इस उपलब्धि को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने समस्त टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं एवं उनकी इस उपलब्धि को विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय बताया।
यह डिज़ाइन डिज़ाइन संख्या 474597-001 के अंतर्गत 23 सितंबर 2025 को क्लास 14-02 में, डिज़ाइन्स अधिनियम, 2000 एवं डिज़ाइन्स नियम, 2001 के प्रावधानों के अनुसार पंजीकृत किया गया, जिसके फलस्वरूप भारत सरकार के बौद्धिक संपदा कार्यालय द्वारा डिजाइन पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी किया गया।
यह पेटेंटेड डिज़ाइन समकालीन पुस्तकालयों की एक प्रमुख समस्या जैसे तेजी से बढ़ते पुस्तक संग्रह और सीमित मानव संसाधनों का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है। यह स्वचालित प्रणाली बुद्धिमान पुस्तक छँटाई एवं सुव्यवस्थित पुस्तकालय संचालन को सक्षम बनाती है, जिससे मैनुअल श्रम में कमी, त्रुटियों का न्यूनिकरण तथा शैक्षणिक एवं अनुसंधान पुस्तकालयों की सेवा दक्षता में उल्लेखनीय सुधार संभव हो सकेगा।
यह उपलब्धि भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुप्रयुक्त एवं समाधान-उन्मुख अनुसंधान पर बढ़ते फोकस को रेखांकित करती है। एक व्यावहारिक और उपयोगी डिज़ाइन के लिए कानूनी संरक्षण प्राप्त करना स्मार्ट पुस्तकालय समाधानों के वास्तविक क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस डिज़ाइन का पंजीकरण भारत में स्मार्ट पुस्तकालयों एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम सूचना सेवाओं के विकास में एक सार्थक योगदान है। यह न केवल शोधकर्ताओं के बौद्धिक अधिकारों की सुरक्षा करता है, बल्कि पायलट कार्यान्वयन, संस्थागत अंगीकरण एवं संभावित व्यावसायीकरण के नए अवसर भी प्रदान करता है। यह उपलब्धि पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान को एक नवाचार-आधारित, गतिशील अनुशासन के रूप में सुदृढ़ करती है और राष्ट्रीय डिजिटल परिवर्तन एवं ज्ञान अवसंरचना के लक्ष्यों के अनुरूप प्रभावी बौद्धिक संपदा सृजन में ठठ।न्, लखनऊ की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है।
इस अवसर पर विभाग के शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भी शोध टीम को उनकी इस उपलब्धि हेतु बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

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