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‘बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ’ अभियान के 11 वर्ष पूरे, सुकन्या समृद्धि योजना निभा रही अहम भूमिका

अहमदाबाद। भारत सरकार के ‘बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ’ अभियान ने 22 जनवरी को अपने 11 वर्ष पूरे कर लिए। यह अभियान 22 जनवरी 2015 को प्रारंभ किया गया था, जिसका उद्देश्य लिंग के आधार पर चयन को रोकना, बालिकाओं के अस्तित्व और सुरक्षा को सुनिश्चित करना तथा उनकी शिक्षा को बढ़ावा देना है। यह केंद्र सरकार की शत-प्रतिशत वित्तपोषित योजना है, जिसे देश के सभी जिलों में लागू किया जा रहा है। इसी क्रम में बालिकाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सुकन्या समृद्धि योजना भी प्रभावी रूप से संचालित की जा रही है।

उत्तर गुजरात परिक्षेत्र, अहमदाबाद के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि बालिकाओं के सशक्तिकरण की दिशा में सुकन्या समृद्धि योजना एक अहम भूमिका निभा रही है। इस योजना के तहत मात्र 250 रुपये से 10 वर्ष तक की बालिकाओं का खाता डाकघर में खोला जा सकता है। वर्तमान में इस योजना पर 8.2 प्रतिशत ब्याज मिल रहा है, जो अन्य लघु बचत योजनाओं की तुलना में अधिक है। यह योजना बेटियों की शिक्षा एवं विवाह के लिए एक सुरक्षित और लाभकारी निवेश मानी जा रही है।

उन्होंने बताया कि सुकन्या समृद्धि खाते में एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 250 रुपये और अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक जमा किए जा सकते हैं। खाता खोलने के बाद केवल 15 वर्ष तक ही धन जमा करना होता है। बालिका की आयु 18 वर्ष होने पर जमा राशि का 50 प्रतिशत तथा खाता खुलने के 21 वर्ष पूर्ण होने पर संपूर्ण राशि निकाली जा सकती है।

पोस्टमास्टर जनरल ने जानकारी दी कि उत्तर गुजरात परिक्षेत्र के डाकघरों में अब तक 4.90 लाख से अधिक सुकन्या समृद्धि खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें 21 अरब रुपये से अधिक की राशि जमा है। वहीं पूरे गुजरात परिमंडल में लगभग 16.35 लाख बेटियों के सुकन्या खाते खोले गए हैं, जिनमें 66 अरब रुपये से अधिक की कुल जमा राशि है।

उन्होंने बताया कि गांवों में डाक चौपाल और स्कूलों के माध्यम से विशेष अभियान चलाकर सभी पात्र बालिकाओं को योजना से जोड़ा जा रहा है। उत्तर गुजरात में 1015 गांवों को संपूर्ण सुकन्या समृद्धि ग्राम घोषित किया जा चुका है, जहां दस वर्ष तक की सभी पात्र बालिकाओं के खाते डाकघरों में खोले गए हैं। इसके साथ ही किसी गांव में बेटी के जन्म की सूचना मिलते ही डाकिया स्वयं सुकन्या खाता खुलवाने के लिए संबंधित परिवार तक पहुंच रहा है।

कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि सुकन्या समृद्धि योजना केवल निवेश का माध्यम नहीं है, बल्कि यह बेटियों के उज्ज्वल और सुरक्षित भविष्य से जुड़ी हुई है। इस योजना के आर्थिक के साथ-साथ सामाजिक आयाम भी हैं, जो नारी सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

सहायक निदेशक डाक सेवाएं रितुल गांधी ने बताया कि सुकन्या समृद्धि खाता खुलवाने के लिए बालिका का जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड की प्रति, माता या पिता का आधार कार्ड एवं पैन कार्ड की प्रति तथा दो फोटो के साथ नजदीकी डाकघर में संपर्क किया जा सकता है। इसके साथ ही आयकर अधिनियम की धारा 80सी के अंतर्गत 1.50 लाख रुपये तक की आयकर छूट का भी प्रावधान है।

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