राजीव रंजन नाग: नई दिल्ली। बांग्लादेश ने सोमवार (15 जून) को भारत के डिप्टी हाई कमिश्नर को तलब किया। यह कदम प्रधानमंत्री के पॉलिसी और स्ट्रैटेजी मामलों के सलाहकार ज़ाहिद-उर-रहमान के साथ हुए व्यवहार के विरोध में उठाया गया। रहमान को दिल्ली एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने दो घंटे से अधिक समय तक रोके रखा, जिसके बाद उन्होंने भारत का अपना आधिकारिक दौरा रद्द कर दिया।
यह घटना तब हुई जब रहमान 15-16 जून को होने वाली इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में बांग्लादेश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे थे। इस घटना पर ढाका की ओर से यह पहली औपचारिक प्रतिक्रिया थी। बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, भारत के डिप्टी हाई कमिश्नर और बांग्लादेश में कार्यवाहक प्रमुख (चार्ज डी अफेयर्स) पवन बधे को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय में तलब किया गया। यूएनबी समाचार एजेंसी के मुताबिक, उन्हें “इस घटना को लेकर नई दिल्ली के प्रति ढाका की नाराज़गी से अवगत कराया गया।”
इससे पहले, बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने इस घटना को “अप्रत्याशित और दुर्भाग्यपूर्ण” बताया था। उन्होंने कहा कि मंत्रालय इसके जवाब में उचित कदम उठा रहा है और बाद में अपनी स्थिति स्पष्ट करेगा। राजनयिक सूत्रों के अनुसार, भारत में बांग्लादेश के हाई कमिश्नर एम. रियाज़ हमीदुल्लाह एयरपोर्ट पर मौजूद थे और उन्होंने इमिग्रेशन अधिकारियों के सामने रहमान की पहचान की थी। सूत्रों ने यह भी बताया कि भारतीय अधिकारियों को पहले ही सूचित कर दिया गया था कि वह बांग्लादेश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।
सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों ने बिना किसी परेशानी के इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी कर ली, जबकि रहमान को दो घंटे से अधिक समय तक रोके रखा गया। सूत्रों ने बताया कि ढाई घंटे से अधिक इंतज़ार करने के बाद रहमान ने दौरा आगे न बढ़ाने का फैसला किया और अधिकारियों को सूचित किया कि वह ढाका लौट जाएंगे। उन्होंने आगे बताया कि बाद में भारतीय अधिकारियों ने उन्हें सूचित किया कि इस मुद्दे को सुलझाया जा सकता है और उनसे दौरा जारी रखने का आग्रह किया। हालांकि, रहमान ने भारत में प्रवेश न करने का फैसला किया और ढाका लौटने से पहले कोलंबो के लिए रवाना हो गए। इस घटना के बारे में भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
रविवार को सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी गई कि नियमित इमिग्रेशन जांच के दौरान सुरक्षा से जुड़ी वॉचलिस्ट में नाम आने के बाद रहमान को रोका गया था। चैनल के अनुसार, यह मुद्दा एक प्रशासनिक त्रुटि के कारण उत्पन्न हुआ था। हालांकि उनका नाम कथित तौर पर सोशल मीडिया से जुड़ी ब्लैकलिस्ट से हटा दिया गया था, लेकिन खबर है कि वह इमिग्रेशन वॉचलिस्ट में बना हुआ था, जिससे उनके आने पर अलर्ट सक्रिय हो गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि गड़बड़ी का पता चलने के बाद उन्हें देश में प्रवेश की मंजूरी दे दी गई। वह बांग्लादेश के सबसे चर्चित राजनीतिक टिप्पणीकारों में से एक हैं। पेशे से डॉक्टर रहे रहमान ने अखबारों में कॉलम लिखकर, टीवी कार्यक्रमों में भाग लेकर और अपने यूट्यूब चैनल “ज़ाहिद्स टेक” (Zahed’s Take) के माध्यम से बड़ी संख्या में फॉलोअर्स बनाए। इसके बाद इस वर्ष की शुरुआत में वह राज्य मंत्री के दर्जे के साथ प्रधानमंत्री के सलाहकार के रूप में सरकार में शामिल हुए। दिलचस्प बात यह है कि उनका यूट्यूब चैनल भारत में अभी भी उपलब्ध नहीं है।
इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों का मानना नहीं है कि यह मुद्दा उनके पास मौजूद पासपोर्ट से जुड़ा था, क्योंकि भारतीय अधिकारियों को उनके आधिकारिक पद और IORA बैठक में उनकी प्रस्तावित भागीदारी के बारे में जानकारी थी। रहमान SAARC वीज़ा स्टिकर वाले साधारण पासपोर्ट पर यात्रा कर रहे थे। इसके बावजूद, बांग्लादेश के प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों ने, जिनमें एक अतिरिक्त सचिव भी शामिल थे, IORA बैठक में हिस्सा लिया। इस घटना ने तुरंत ढाका का ध्यान आकर्षित किया। बांग्लादेशी अखबार ‘प्रोथोम आलो’ के मुताबिक, अधिकारी इस बात पर निर्णय लेने से पहले जानकारी एकत्र कर रहे थे कि क्या आगे कोई प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता है।
यह दूसरी बार था जब प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार के सत्ता में आने के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारतीय मिशन के कार्यवाहक प्रमुख पवन बधे को तलब किया। अप्रैल में ढाका ने उन्हें असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की टिप्पणियों पर विरोध दर्ज कराने के लिए बुलाया था। बांग्लादेश ने इन टिप्पणियों को द्विपक्षीय संबंधों के लिए नुकसानदेह बताया था। बांग्लादेश ने सीमा पार से बिना दस्तावेज़ वाले प्रवासियों को कथित तौर पर वापस धकेले जाने के बारे में सरमा की सार्वजनिक टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई थी।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब भारत और बांग्लादेश, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने और उसके बाद ढाका में बनी अंतरिम सरकार के दौर के बाद संबंधों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार के सत्ता में आने के बाद से बातचीत बढ़ी है, लेकिन कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। इनमें ढाका की वह आलोचना भी शामिल है, जिसमें वह भारतीय अधिकारियों द्वारा बांग्लादेशी नागरिकों को ज़बरदस्ती सीमा पार धकेलने का आरोप लगाता है। नई दिल्ली ने बांग्लादेश में हाई कमिश्नर के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता दिनेश त्रिवेदी को नियुक्त कर संबंधों को नया बल देने की कोशिश की है। उन्होंने करियर राजनयिक प्रणय वर्मा का स्थान लिया है।





