रायबरेली। केंद्रीय बजट 2026 को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए अतुल सिंह ने कहा कि यह बजट आम नागरिक, मध्यम वर्ग, किसानों और युवाओं को महंगाई से राहत, रोजगार सृजन और बेहतर सार्वजनिक सेवाएं देने में विफल रहा है। बजट के समग्र अध्ययन से स्पष्ट होता है कि इसमें आम जनता की जमीनी समस्याओं को प्राथमिकता नहीं दी गई है।
उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के दौर में शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रोजमर्रा के खर्चों के मुकाबले बजट में किए गए प्रावधान अपर्याप्त हैं। महंगाई नियंत्रण के लिए पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और आवश्यक वस्तुओं पर कोई ठोस राहत नहीं दी गई, जबकि इन्हीं खर्चों का बोझ आम परिवारों पर सबसे अधिक पड़ता है।
अतुल सिंह ने कहा कि बेरोजगारी देश की एक गंभीर समस्या बनी हुई है, लेकिन बजट में स्थायी और गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजन के लिए कोई स्पष्ट कार्ययोजना सामने नहीं आई है। इससे विशेष रूप से शिक्षित युवाओं में निराशा का माहौल है।
उन्होंने कृषि क्षेत्र पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के दावे तो दोहराए गए हैं, लेकिन खेती की बढ़ती लागत, न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी और छोटे किसानों की वास्तविक समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्रों में अपेक्षित निवेश की कमी और निजीकरण पर बढ़ते जोर को उन्होंने चिंता का विषय बताया। अतुल सिंह ने कहा कि यह बजट आम आदमी की जरूरतों के बजाय बड़े उद्योगों और पूंजीगत हितों को प्राथमिकता देने वाला है। देश को ऐसे बजट की आवश्यकता है जो आम नागरिक के जीवन में वास्तविक राहत और भरोसे का संचार कर सके।





