रायबरेली। 99वें आई.आर.एस.एम.ई. दिवस के अवसर पर IRIMEE Jamalpur में प्रशांत कुमार मिश्रा, महाप्रबंधक, आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना एवं अतिरिक्त प्रभार महाप्रबंधक, रेल कोच फैक्ट्री द्वारा भारतीय रेलवे के इतिहास पर आधारित उनकी दो बहुप्रतीक्षित पुस्तकों — When History Was Created in 19th Century Colonial India, 1841–1871 तथा Tales from Rails — का विमोचन किया गया।
इस अवसर पर श्री मिश्रा ने ईस्ट इंडियन रेलवे की ऐतिहासिक विरासत पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि भारत में प्रारंभिक रेल विकास में पूर्वी क्षेत्र की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। साम्राज्यवादी पृष्ठभूमि में प्रारंभ हुई यह रेल व्यवस्था समय के साथ राष्ट्रीय परिवर्तन का माध्यम बनी।
दोनों पुस्तकें ईस्ट इंडियन रेलवे के आरंभिक वर्षों का व्यापक, शोधपरक एवं प्रामाणिक इतिहास प्रस्तुत करती हैं। प्राथमिक स्रोतों पर आधारित यह शोध दर्शाता है कि कैसे रेल ने केवल भौगोलिक दूरियाँ ही नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन की दिशा भी निर्धारित की।
आरेडिका की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए श्री मिश्रा ने बताया कि 1 अप्रैल 2014 से अब तक आरेडिका ने कुल 15,369 कोचों का उत्पादन किया है। चालू वर्ष में 1800 कोचों का निर्माण किया जा चुका है। फरवरी 2026 में 16 डिब्बों वाली प्रथम वंदे भारत चेयर कार रेक के निर्माण का प्रस्ताव है। फरवरी माह में ही 50,000 फोर्ज्ड व्हील का उत्पादन किया गया है।
पर्यावरण संरक्षण के अंतर्गत हजारों पौधों का रोपण किया गया तथा वर्षा जल संचयन संरचनाओं की कुल क्षमता 748 मिलियन लीटर तक पहुंचाई गई है। पिछले तीन वर्षों में हरित पार्क, बच्चों के उद्यान एवं पारिस्थितिकीय विकास से जुड़े अनेक कार्य किए गए हैं। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में रेलवे की महत्वपूर्ण भूमिका का भी उल्लेख किया।
इस दौरान कार्यक्रम में विशिष्ट उपस्थिति बी. सुब्बाराव (महाप्रबंधक, इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई), अनिमेष कुमार सिन्हा (डीजी, इरिमी जमालपुर), सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षु अधिकारी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।
भारतीय रेल के सबसे पुराने जमालपुर संस्थान में इन पुस्तकों का विमोचन भारतीय रेलवे की समृद्ध विरासत और उसके परिवर्तनकारी प्रभाव के प्रति बढ़ती रुचि का प्रतीक बताया गया। उक्त जानकारी आर.एन. तिवारी, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, आरेडिका ने दी।





