नई दिल्ली। किसानों और ट्रेड यूनियनों ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि मौजूदा नीतियां किसानों और मजदूरों दोनों की आजीविका के लिए खतरा बन रही हैं। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और विभिन्न केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के हजारों सदस्य दिल्ली में एकत्र हुए और “मज़दूर किसान संसद” का आयोजन किया। यह एक प्रतीकात्मक सभा थी, जहां किसानों और मजदूरों ने अपनी चिंताओं को साझा करते हुए सरकार पर नीतियों में बदलाव का दबाव बनाने की कोशिश की।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में प्रस्तावित भारत-संयुक्त राज्य अमेरिका व्यापार समझौते को रद्द करना शामिल है। उनका कहना है कि इस समझौते से भारतीय कृषि को वैश्विक बाजार में अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा उन्होंने चार नए लेबर कोड को वापस लेने की मांग भी की, यह आरोप लगाते हुए कि नया श्रम ढांचा मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करता है और काम की परिस्थितियों को और कठिन बना सकता है।
किसान प्रतिनिधियों ने बिजली बिल 2025 को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि इससे सिंचाई की लागत बढ़ेगी और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन 2.0 को वापस लेने की मांग की। यह नीति बुनियादी ढांचे की सरकारी परिसंपत्तियों को निजी कंपनियों को लीज पर देने से जुड़ी है, जिसे यूनियनों ने राष्ट्रीय संसाधनों के निजीकरण के रूप में बताया।
संयुक्त संघर्ष पर जोर
मज़दूर किसान संसद में किसान नेताओं ने कहा कि किसानों और मजदूरों का संघर्ष आपस में जुड़ा हुआ है। उनका कहना है कि खेती, मजदूरी और सार्वजनिक संसाधनों से जुड़ी नीतियों का असर दोनों वर्गों पर समान रूप से पड़ता है, इसलिए संयुक्त आंदोलन की जरूरत है।
प्रमुख मांगें
किसान और मजदूर संगठनों ने कई सामाजिक-आर्थिक मांगें भी रखीं। इनमें मनरेगा के तहत 200 दिन का रोजगार, 700 रुपये की दैनिक मजदूरी, किसानों के लिए पूर्ण कर्ज माफी और पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली शामिल है।इसके अलावा संगठनों ने 2026 में प्रस्तावित “किसान जीवन सुरक्षा और दुर्घटना प्रतिपूर्ति विधेयक” के तहत 25 लाख रुपये के मुआवजे की मांग को लेकर भी विरोध दर्ज कराया। साथ ही #यूजीसी एक्ट 2026 के खिलाफ भी प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आने वाले समय में किसानों और मजदूरों के मुद्दों पर संयुक्त आंदोलन को और मजबूत किया जाएगा।
Story and Pic by: Kamal Nain Narang





