राजीव रंजन नाग: नई दिल्ली। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव आखिरकार गिर गया। हालांकि प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान लोकसभा में तीखा राजनीतिक टकराव और जोरदार हंगामा देखने को मिला।
बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर की गई टिप्पणी के बाद विपक्षी दलों के सांसदों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। अमित शाह ने कहा कि जब विपक्ष के शीर्ष नेता स्वयं संसद में आंख मारने, प्रधानमंत्री को गले लगाने और फ्लाइंग किस देने जैसे व्यवहार करते हैं, तो वह दूसरों को भड़काने का काम करते हैं। इस टिप्पणी के तुरंत बाद विपक्षी सांसदों ने इसे असंसदीय भाषा बताते हुए विरोध शुरू कर दिया और सदन में जोरदार नारेबाजी होने लगी।
लगातार हंगामे के बीच वॉयस वोट कराया गया, जिसमें विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव गिर गया। सदन में संख्या बल पहले से ही सरकार के पक्ष में था। विपक्ष के पास कुल 238 सांसद हैं, जिनमें कांग्रेस के 99 सांसद शामिल हैं, जबकि सरकार को 293 सांसदों का समर्थन प्राप्त है। इनमें भाजपा के 240, जदयू के 16, टीडीपी के 12 और अन्य एनडीए दलों के सांसद शामिल हैं।
ऐसे में माना जा रहा था कि प्रस्ताव का पारित होना संभव नहीं है। विपक्ष का कहना था कि इस प्रस्ताव के माध्यम से वह सदन में अपनी चिंताओं को दर्ज कराना चाहता है। प्रस्ताव के नोटिस में स्पीकर पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया गया था।
विपक्ष का आरोप था कि लोकसभा स्पीकर के रूप में ओम बिरला ने सदन के सभी पक्षों का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक निष्पक्षता नहीं बरती। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि यह कदम किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि सदन की गरिमा और निष्पक्षता की रक्षा के लिए उठाया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्पीकर के कुछ फैसलों से सदस्यों के अधिकार प्रभावित हुए हैं और कई मामलों में सत्तारूढ़ दल के पक्ष में निर्णय लिए गए। विपक्ष ने यह भी कहा कि बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे और अन्य नेताओं की एक अप्रकाशित पुस्तक के अंश पढ़ने की अनुमति नहीं दी गई थी तथा आठ विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था।
जवाब में अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जब ओम बिरला स्पीकर चुने गए थे, तब सरकार और विपक्ष दोनों ने उनका समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि स्पीकर के फैसलों से असहमति हो सकती है, लेकिन संसदीय परंपरा के अनुसार स्पीकर का निर्णय अंतिम माना जाता है।
शाह के भाषण के दौरान राहुल गांधी पर व्यक्तिगत टिप्पणी को लेकर विपक्षी सांसदों ने विरोध तेज कर दिया और कई सदस्य नारे लगाते हुए सदन के वेल में पहुंच गए। इसके बाद पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने वॉयस वोट के जरिए प्रस्ताव पर निर्णय कराया और दिन की कार्यवाही समाप्त कर दी।





