सलोन, रायबरेली। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026 के अवसर पर एम्स रायबरेली के ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र (सीआरएचए), सलोन में आशा कार्यकर्ताओं के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य खाद्य पदार्थों में होने वाली मिलावट की पहचान के प्रति आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करना तथा समुदाय स्तर पर खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। प्रशिक्षण के दौरान आशा कार्यकर्ताओं को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा विकसित सरल घरेलू परीक्षणों के माध्यम से दैनिक उपयोग की लगभग 50 खाद्य सामग्रियों में मिलावट की पहचान करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही विभिन्न खाद्य पदार्थों में होने वाली सामान्य मिलावटों तथा उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की विस्तृत जानकारी भी प्रदान की गई।
यह कार्यक्रम एम्स रायबरेली की कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) अमिता जैन के निर्देशानुसार तथा सामुदायिक चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) भोला नाथ के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का संचालन डॉ. मुकेश शुक्ला, एडिशनल प्रोफेसर एवं केंद्र प्रभारी, सेंटर फॉर रूरल हेल्थ (सीआरएचए), एम्स रायबरेली के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. स्वलेहा (सीनियर रेजिडेंट), डॉ. शैव्या चौहान तथा डॉ. हिशाम (जूनियर रेजिडेंट), सामुदायिक चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य विभाग, एम्स रायबरेली ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के दौरान खाद्य सुरक्षा के महत्व, मिलावटी खाद्य पदार्थों से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों तथा घरेलू स्तर पर मिलावट की पहचान करने की विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। आशा कार्यकर्ताओं ने प्रशिक्षण में उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने-अपने क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा संबंधी जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट की समय रहते पहचान कर अनेक गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि आशा कार्यकर्ता समुदाय स्तर पर जन-जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, इसलिए उन्हें इस प्रकार का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना जनस्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।





