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सरकारी और भाजपा कार्यक्रमों का केंद्र बना बागला इंटर कॉलेज, पढ़ाई पर संकट

हाथरस। शहर का प्रतिष्ठित बागला इंटर कॉलेज इन दिनों शिक्षा के बजाय सरकारी और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े कार्यक्रमों का स्थायी स्थल बनता जा रहा है। कभी विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षा और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए पहचाना जाने वाला यह कॉलेज अब राजनीतिक और प्रशासनिक आयोजनों के कारण लगातार चर्चा में है। इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी और शिक्षक बेफिक्र नजर आ रहे हैं।

लगातार आयोजित हो रही सरकारी बैठकों, समीक्षा कार्यक्रमों, सम्मान समारोहों और भाजपा से संबंधित आयोजनों के चलते कॉलेज परिसर को बार-बार खाली कराया जाता है। कई बार कक्षाएं स्थगित कर दी जाती हैं तो कई बार छात्रों को समय से पहले घर भेज दिया जाता है। परीक्षा और प्रायोगिक कार्यों के दौरान भी शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हो रहा है, जिससे विद्यार्थियों में असंतोष और भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि पढ़ाई का नियमित माहौल पूरी तरह बिगड़ चुका है। तय समय पर कक्षाएं नहीं लग पा रहीं, सिलेबस समय से पूरा नहीं हो रहा और शिक्षण कार्य में लगातार बाधा उत्पन्न हो रही है। इसका सबसे अधिक असर उन छात्रों पर पड़ रहा है जो बोर्ड परीक्षा या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

स्थिति यह भी है कि पढ़ाई ठप होने का लाभ कुछ शिक्षक उठा रहे हैं। आरोप है कि विद्यालय में पढ़ाने के बजाय वे छात्रों को निजी ट्यूशन की ओर प्रेरित कर रहे हैं। जब स्कूल में नियमित कक्षाएं नहीं चलतीं, तो मजबूरन छात्रों को बाहर ट्यूशन लेनी पड़ती है। इससे न केवल ट्यूशनखोरी को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।

स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि सरकारी विद्यालय का इस प्रकार राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों के लिए उपयोग करना नियमों के विपरीत है। विद्यालय बच्चों की शिक्षा के लिए होते हैं, न कि मंच, माइक और भीड़ जुटाने के लिए। यदि प्रशासन को कार्यक्रम आयोजित करने ही हैं तो उसके लिए अन्य सरकारी भवन और सभागार उपलब्ध हैं।

शिक्षा से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो बागला इंटर कॉलेज की शैक्षणिक पहचान को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। विद्यालय का शैक्षिक वातावरण प्रभावित होने से अनुशासन, परीक्षा परिणाम और छात्रों का भविष्य तीनों खतरे में पड़ सकते हैं। इसके बावजूद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

अब आवश्यकता इस बात की है कि बागला इंटर कॉलेज को पुनः शिक्षा का केंद्र बनाया जाए। सरकारी और राजनीतिक कार्यक्रमों पर रोक लगाई जाए, नियमित कक्षाएं संचालित हों और छात्रों को उनका शैक्षणिक अधिकार मिले, अन्यथा आने वाले समय में इसका खामियाजा पूरे शहर को भुगतना पड़ सकता है।

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