रायबरेली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायबरेली के कार्डियोवैस्कुलर एवं थोरैसिक सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग द्वारा “द बायोनिक हार्टरूम” विषय पर रोबोटिक्स एवं थ्री-डी प्रिंटिंग आधारित सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम (सीएमई) का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा और अपने निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ण प्राप्ति में सफल सिद्ध हुआ।
इस सीएमई का मुख्य उद्देश्य स्नातक एवं स्नातकोत्तर युवा चिकित्सकों को चुनौतीपूर्ण किंतु रोमांचक सीटीवीएस विशेषज्ञता की ओर प्रेरित करना तथा उन्हें रोबोटिक सर्जरी जैसी आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना था। हृदय रोगों की बढ़ती वैश्विक प्रवृत्ति के बीच सीटीवीएस एक ऐसी विशिष्ट चिकित्सा शाखा है, जो उच्च स्तर के परिश्रम, तकनीकी दक्षता और मानवीय करुणा की मांग करती है।
कार्यक्रम का आयोजन एम्स रायबरेली की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. डॉ. अमिता जैन के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. विनय कृष्णा, पूर्व निदेशक, एलपीएस इंस्टिट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर रहे। सीटीवीएस के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान और दूरदर्शी विचारों ने उपस्थित चिकित्सकों को गहराई से प्रेरित किया।
कार्यक्रम में विशिष्ट वक्ताओं के रूप में प्रो. डॉ. संजय कुमार (पूर्व विभागाध्यक्ष, सीटीवीएस, आईएमएस बीएचयू), डॉ. अखिलेश पांडेय (डायरेक्टर, ग्राफिक एरा इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, देहरादून) तथा डॉ. श्रेया मेहरोत्रा (डीएसटी इंस्पायर फैकल्टी, आईआईटी कानपुर) ने भाग लिया। वक्ताओं ने हृदय शल्य चिकित्सा के वर्तमान परिदृश्य और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के अंत में एएमएस डॉ. नीरज श्रीवास्तव द्वारा पोस्ट टेस्ट में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले स्नातक छात्रों को प्रमाण-पत्र (सर्टिफिकेट ऑफ अचीवमेंट) वितरित किए गए। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. स्वाति पाठक ने रोबोटिक सर्जरी सिस्टम पर विस्तृत तकनीकी जानकारी साझा करते हुए इसके व्यावहारिक उपयोग, लाभ और भविष्य में इसकी भूमिका को सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाया। कार्यक्रम के सुचारु संचालन में डॉ. संकल्प का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
यह सीएमई एम्स रायबरेली के चिकित्सकों के लिए उन्नत तकनीकों को अपनाने, रोबोटिक सर्जरी में दक्षता विकसित करने तथा आमजन को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।





