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बेटियों के अधिकारों की बात लेकर खाप पंचायतों के बीच पहुंचीं जिलाधिकारी

विश्व बंधु शास्त्री: बागपत। उत्तर प्रदेश के बागपत में सामाजिक सोच को नई दिशा देने की पहल उस समय सामने आई, जब जिलाधिकारी अस्मिता लाल बेटियों के अधिकारों की बात लेकर खाप पंचायतों के बीच पहुँचीं। खेकड़ा में आयोजित सर्व खाप सम्मान समारोह में उन्होंने बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ अभियान को केंद्र में रखते हुए समाज से सीधा संवाद किया और खाप पंचायतों से बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर सुनिश्चित करने की अपील की।
कार्यक्रम में सर्वसमाज के खाप चौधरी, थांबेदार, मुखिया, लंबरदार, ब्लॉक अध्यक्ष, ग्राम प्रतिनिधि और विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में यही संदेश प्रमुख रहा कि सामाजिक परंपराओं के साथ अब समय के अनुरूप सोच में बदलाव जरूरी है। जिलाधिकारी ने कहा कि ग्रामीण समाज में खाप पंचायतों की भूमिका प्रभावशाली रही है और यदि सभी खाप बेटियों के पक्ष में एकजुट होकर खड़ी हों, तो सकारात्मक बदलाव तेजी से जमीन पर उतरेगा।
जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में लिंगानुपात, बालिका शिक्षा और सामाजिक मानसिकता जैसे संवेदनशील विषयों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण-हत्या और लैंगिक भेदभाव जैसी कुरीतियों पर रोक में समाज की भूमिका महत्वपूर्ण है। बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ को उन्होंने सिर्फ सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन बताते हुए कहा कि हर पंचायत, हर परिवार और हर नागरिक को इसकी जिम्मेदारी निभानी होगी।
उन्होंने कहा कि सशक्त नारी ही सशक्त समाज की आधारशिला होती है। जब बेटियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और निर्णयों में बराबरी का अधिकार मिलेगा, तभी समाज संतुलित और मजबूत बनेगा। जिलाधिकारी ने खाप प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि पंचायत स्तर पर बेटियों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए, स्कूल छोड़ चुकी बालिकाओं की पहचान कर उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ा जाए और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जाए।
बेटियों के अधिकारों को लेकर जिलाधिकारी अस्मिता लाल के नेतृत्व में बागपत प्रशासन ने पहली बार खाप पंचायतों के बीच सीधा संवाद करने की पहल की है जिसके तहत जगह जगह खाप पंचायतों का सहयोग मिल रहा है और बागपत में बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए सभी हितधारक लोग एकजुट हो रहे है और बागपत महिला हितैषी बनने की ओर तेजी से अग्रसर है।
समारोह के दौरान सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों पर भी जोर दिया गया। बेटियों को समान अधिकार देना भारतीय संविधान की भावना है और यही सभ्य समाज की पहचान है। सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रशासन के साथ मिलकर गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाने और सोच में बदलाव लाने के प्रयास तेज करने का भरोसा दिलाया।
जिलाधिकारी ने उपस्थित जनसमूह को बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ की सामूहिक शपथ दिलाई। शपथ के दौरान कन्या भ्रूण-हत्या के विरोध, बालिकाओं की शिक्षा सुनिश्चित करने, विवाह और पारिवारिक निर्णयों में समानता रखने तथा किसी भी प्रकार के लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने का संकल्प लिया गया। खाप चौधरियों और पंचायत प्रतिनिधियों ने मंच से आश्वासन दिया कि वे इस संकल्प को अपने-अपने क्षेत्रों में व्यवहार में उतारेंगे।
कार्यक्रम के समापन पर जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन समाज के साथ मिलकर बेटियों के अधिकारों की रक्षा और सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून अपना काम कर रहा है लेकिन स्थायी बदलाव के लिए जरूरी है कि समाज स्वयं आगे बढ़कर अपनी जिम्मेदारी निभाए और उदाहरण प्रस्तुत करे। इस दौरान अनेक खाप प्रतिनिधि एसडीएम निकेत वर्मा आदि अन्य मौजूद रहे।

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