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केंद्रीय बजट 2026–27 पर हाथरस में सियासी प्रतिक्रियाओं की बौछार

हाथरस। केंद्रीय बजट 2026–27 को लेकर हाथरस जिले में राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाओं ने गर्माहट पैदा कर दी है। सत्तापक्ष इसे विकासोन्मुखी और सर्वसमावेशी बता रहा है, जबकि विपक्ष ने आम आदमी, किसानों और युवाओं की उम्मीदों से इसे दूर बताया।

कांग्रेस सिपाही और पूर्व जिलाध्यक्ष चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने कहा कि बजट बड़े दावों से भरा है, लेकिन जमीनी हकीकत से कटा हुआ नजर आता है। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की आमदनी जैसे बुनियादी मुद्दों पर ठोस समाधान की कमी को निराशाजनक बताया। उन्होंने कविता के माध्यम से कहा, “कागज़ पर खुशहाली लिख दी गई, पर रसोई अब भी खाली है। बजट में आम जन की आवाज़ नहीं, बस आँकड़ों की एक थाली है।”

वहीं भाजपा नेता वासुदेव माहोर ने बजट को तेज़ आर्थिक विकास को गति देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट नागरिकों को सशक्त बनाएगा और भारत के भविष्य को नई दिशा देगा। मजबूत आर्थिक आधार और दीर्घकालिक दृष्टि के साथ यह बजट ‘विकसित भारत’ के अगले अध्याय का मार्ग प्रशस्त करेगा।

चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रतीक अग्रवाल ने बजट को संतुलित और विकास को आगे बढ़ाने वाला बताया। उन्होंने रोजगार सृजन, अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कर नियमों को सरल बनाने पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि सड़क, रेल, बिजली और बुनियादी ढांचे के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान नए रोजगार पैदा करेगा। सरकारी घाटा 4.3 प्रतिशत पर सीमित रखने का प्रयास किया गया है, आयकर दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया और नया आयकर कानून अगले वर्ष से लागू होगा।

भाजपा विधायक अंजुला सिंह माहौर ने इसे ऐतिहासिक बजट बताते हुए कहा कि यह आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की दिशा में मजबूत कदम है। मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, पर्यटन, ग्रामीण विकास, नई तकनीक और खेल जैसे क्षेत्रों को इससे नई गति मिलेगी। भाजपा जिलाध्यक्ष प्रेम सिंह कुशवाहा ने बजट को सर्वसमावेशी बताते हुए कहा कि यह देश के हर क्षेत्र और जन-जन के कल्याण का बजट है।

वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष विवेक उपाध्याय ने कहा कि बजट महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की बदहाली जैसे मुद्दों पर मौन है। युवाओं के लिए न ठोस रोजगार योजना है और न ही किसानों को लागत के अनुरूप एमएसपी की गारंटी। समाजवादी पार्टी जिलाध्यक्ष देवेंद्र सिंह कुशवाहा ने इसे अत्यंत निराशाजनक बताया और कहा कि गरीबों, युवाओं, मजदूरों और महिलाओं के लिए इसमें कुछ ठोस नहीं है।

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