रायबरेली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायबरेली के न्यूरोलॉजी विभाग द्वारा सोमवार को विश्व मिर्गी दिवस के अवसर पर मिर्गी रोग के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन एम्स रायबरेली की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर डॉ. अमिता जैन के नेतृत्व में किया गया।
इस अवसर पर न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अर्चना वर्मा ने न्यूरोसिस्टिसर्कोसिस एवं मिर्गी रोग के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि न्यूरोसिस्टिसर्कोसिस एक गंभीर लेकिन पूरी तरह इलाज योग्य मस्तिष्क रोग है, जो परजीवी संक्रमण के कारण होता है। यह संक्रमण दूषित भोजन या पानी के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर मस्तिष्क में सिस्ट बना देता है, जिससे मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि भारत जैसे विकासशील देशों में मिर्गी के अनेक मामलों का प्रमुख कारण यही बीमारी है।
न्यूरोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आशुतोष कुमार मिश्रा ने मिर्गी के दौरों से बचाव एवं उपचार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, तनाव से बचाव, स्वच्छता तथा संतुलित आहार मिर्गी को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। उन्होंने बताया कि मिर्गी का इलाज संभव है और चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवाओं का नियमित सेवन अत्यंत आवश्यक है। दौरे की स्थिति में मरीज को सुरक्षित स्थान पर लिटाना चाहिए और शीघ्र चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
कार्यक्रम में उपस्थित एडिशनल प्रोफेसर एवं अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरज कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि मिर्गी एक मस्तिष्क से संबंधित चिकित्सकीय समस्या है, जिसका समय पर एवं सही उपचार से प्रभावी इलाज संभव है। उन्होंने समाज से मिर्गी पीड़ित व्यक्तियों के प्रति सकारात्मक, संवेदनशील एवं सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की और कहा कि ऐसे मरीजों को समान अधिकार एवं सम्मान मिलना चाहिए।
इस अवसर पर एसोसिएट प्रोफेसर सह उप-चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरुनप्रीत कौर सहित अन्य संकाय सदस्य, मरीज एवं उनके तीमारदार उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य मिर्गी के प्रति भ्रांतियों को दूर करना और आमजन को इसके उपचार एवं रोकथाम के प्रति जागरूक करना रहा।





