लखनऊ। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनूप कुमार श्रीवास्तव ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए विनियमों का विरोध करते हुए उन्हें समाज के लिए विभाजनकारी बताया है। उन्होंने 8 मार्च 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में अपराह्न 12:00 बजे आयोजित होने वाले “यूजीसी रोल बैक महा सम्मेलन” में कायस्थ समाज सहित समस्त सवर्ण समाज से बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की है। लखनऊ स्थित अपने निजी आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि महासभा यूजीसी द्वारा अधिसूचित “प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026” का पूर्ण रूप से विरोध करती है। उनके अनुसार, इन प्रावधानों में इक्विटी कमेटी में सामान्य वर्ग की हिस्सेदारी सुनिश्चित नहीं की गई है, जिससे समाज में असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक महत्वपूर्ण योगदान दिया है। समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए संचालित सरकारी योजनाओं से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, किंतु किसी भी वर्ग को एकतरफा रूप से दोषी ठहराने की प्रवृत्ति उचित नहीं है।
डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि यदि सरकार इस विवादित बिल को वापस लेती है तो समाज सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएगा। अन्यथा, आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों सहित भविष्य के चुनावों में इसका राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अंततः जनता ही लोकतंत्र में निर्णय करती है। प्रेस वार्ता का मुख्य उद्देश्य यूजीसी द्वारा जनवरी 2026 में अधिसूचित इक्विटी विनियम 2026 के प्रावधानों के प्रति आपत्ति दर्ज कराना था। डॉ. अनूप कुमार श्रीवास्तव पूर्व में भारत सरकार में प्रधान आयुक्त सहित विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। अंत में उन्होंने समाज के लोगों से 8 मार्च को आयोजित महा सम्मेलन में पहुंचकर अपनी लोकतांत्रिक आवाज उठाने की अपील की।





