रुड़की। शिक्षा और साहित्य जगत के लिए अत्यंत दुखद समाचार है कि प्रख्यात शिक्षाविद् एवं हिंदी की विदुषी डॉ. नीलम शर्मा का देर रात आकस्मिक निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं और देर रात हृदय गति रुकने के कारण उनका देहावसान हो गया। उनके निधन से शिक्षाविदों, विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई। डॉ. नीलम शर्मा शिक्षा तथा हिंदी—दोनों विषयों में डॉक्टरेट उपाधि से विभूषित थीं। उन्होंने अपने शिक्षकीय जीवन की शुरुआत मसूरी और विकासनगर के महाविद्यालयों से की थी। अपने ज्ञान, सरल स्वभाव और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण के कारण वे जल्द ही एक सम्मानित शिक्षिका के रूप में पहचानी जाने लगीं।
उन्होंने अपने लंबे शिक्षकीय जीवन में कई प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्यापन किया। मदरहुड यूनिवर्सिटी, रुड़की, ग्लोकल यूनिवर्सिटी बेहट (सहारनपुर) और श्री ओम यूनिवर्सिटी, रुड़की सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों में उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करते हुए शिक्षा जगत में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके अध्यापन में विद्वता, संवेदनशीलता और साहित्यिक दृष्टि का सुंदर समन्वय देखने को मिलता था। डॉ. नीलम शर्मा का निवास रुड़की के पुरुषोत्तम रेजीडेंसी में था। उनके पति डॉ. वी.के. शर्मा भी शिक्षा जगत के एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् हैं। अपने पीछे वे एक पुत्री को छोड़ गई हैं।
उनके निधन की सूचना मिलते ही उनके निवास पर शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लग गया। शिक्षा जगत से जुड़े अनेक विद्वानों, सहकर्मियों, विद्यार्थियों और शुभचिंतकों ने उन्हें एक समर्पित शिक्षिका, संवेदनशील व्यक्तित्व और आदर्श मार्गदर्शक के रूप में याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।





