लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग अमित कुमार घोष ने कहा कि भारत सरकार के टीबी मुक्त भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की दिशा में उत्तर प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष की वैश्विक थीम “Yes! We can end TB! Led by countries. Powered by people.” एक सशक्त आह्वान है, जो दर्शाती है कि देशों के नेतृत्व और लोगों की सामूहिक भागीदारी से टीबी का अंत संभव है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष 24 मार्च को मनाया जाने वाला विश्व क्षय रोग दिवस यह याद दिलाता है कि टीबी आज भी दुनिया की प्रमुख संक्रामक बीमारियों में से एक है। लेकिन जागरूकता बढ़ाने, समय पर जांच कराने, पूर्ण उपचार सुनिश्चित करने और सामूहिक प्रयासों को मजबूत करने से इस बीमारी को समाप्त किया जा सकता है।
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री के संकल्प और मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में एक व्यापक रणनीति पर कार्य कर रही है। इसमें सक्रिय खोज अभियान, आधुनिक जांच तकनीकें जैसे नैट और एआई आधारित हैंड-हेल्ड चेस्ट एक्स-रे, डिजिटल निगरानी प्रणाली निक्षय पोर्टल, पोषण सहयोग तथा सामुदायिक भागीदारी प्रमुख स्तंभ हैं। यह समन्वित दृष्टिकोण टीबी के खिलाफ लड़ाई को अधिक प्रभावी बना रहा है।
उन्होंने अपील की कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का कार्य नहीं है, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। जागरूकता फैलाकर, समय पर जांच कराकर, उपचार पूरा करके और सामुदायिक सहयोग से टीबी मुक्त उत्तर प्रदेश और टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि 7 दिसंबर 2024 से चल रहे व्यापक स्क्रीनिंग अभियान के तहत अब तक 3 करोड़ 28 लाख से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है। प्रदेश में कुल जांचों में से लगभग 64 प्रतिशत नैट तकनीक से की जा रही हैं, जिससे रोग की शीघ्र और सटीक पहचान संभव हुई है। अभियान के दौरान लाखों मरीजों की अधिसूचना की गई और उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ा गया, साथ ही निक्षय पोषण योजना के तहत वित्तीय सहायता भी प्रदान की गई।
प्रदेश में टीबी जांच और उपचार सुविधाओं के विस्तार में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्तमान में प्रदेश में 1004 नैट जांच मशीनें कार्यरत हैं, जबकि आठ वर्ष पहले इनकी संख्या केवल 141 थी, जो लगभग 612 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। पहले जांच मुख्य रूप से अस्पतालों तक सीमित थी, लेकिन अब मोबाइल हेल्थ वैन और स्क्रीनिंग यूनिट्स के माध्यम से यह सुविधा गांव-गांव तक पहुंचाई जा रही है।
लक्षणहीन संभावित मरीजों की पहचान पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि बीमारी को शुरुआती चरण में ही रोका जा सके। उन्होंने कहा कि पोषण टीबी उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि कुपोषण इस रोग का एक प्रमुख जोखिम कारक है। निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी मरीजों को उपचार के दौरान प्रतिमाह 1000 रुपये सीधे उनके बैंक खाते में स्थानांतरित किए जाते हैं।
पिछले सात वर्षों में 32 लाख से अधिक रोगियों को 1022 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की जा चुकी है, जो उन्हें आर्थिक सहारा देने के साथ-साथ उपचार पूरा करने के लिए प्रेरित भी करती है।
उन्होंने बताया कि सामाजिक भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। निक्षय मित्र अभियान की शुरुआत वर्ष 2019 में राज्यपाल द्वारा की गई थी, जिसमें नागरिक, संस्थाएं और स्वयंसेवी संगठन टीबी रोगियों को पोषण सहायता प्रदान करते हैं। निक्षय पोर्टल के अनुसार वर्ष 2022 से अब तक 98,938 निक्षय मित्रों ने 10,36,215 पोषण पोटलियां उपलब्ध कराने की सहमति दी है।
टीबी मुक्त ग्राम पंचायत अभियान के तहत ग्राम पंचायतें जागरूकता, स्क्रीनिंग और उपचार अनुपालन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वर्ष 2023 में 1372, वर्ष 2024 में 7191 और वर्ष 2025 में 7577 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है।
7 दिसंबर 2024 को शुरू हुए 100 दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया, जिसके लिए 24 मार्च 2025 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा प्रदेश को सम्मानित किया गया।
पिछले दस वर्षों में टीबी की घटना दर और मृत्यु दर में लगभग 17 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2025 में 6.93 लाख टीबी रोगियों की पहचान और अधिसूचना की गई, जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है, जबकि ड्रग सेंसिटिव टीबी की उपचार सफलता दर 92 प्रतिशत तक पहुंच गई है। पिछले आठ वर्षों में 32 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग के दौरान 1.71 लाख मरीजों की पहचान की गई।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में जोखिम वाले समूहों जैसे वृद्ध, कुपोषित, संपर्क में रहने वाले लोग, नशा करने वाले, एचआईवी संक्रमित, मधुमेह रोगी तथा मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश में 87 एआई आधारित हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। जनवरी 2026 में लखनऊ में आयोजित रीजनल एआई इंपैक्ट कॉन्फ्रेंस में टीबी जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर भी जोर दिया गया।
टीबी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ पंचायती राज, ग्राम्य विकास, शिक्षा, आयुष, महिला एवं बाल विकास, श्रम, गृह, नगर विकास, परिवहन और उद्योग जैसे कई विभाग मिलकर कार्य कर रहे हैं, ताकि यह अभियान समाज के हर स्तर तक प्रभावी रूप से पहुंच सके।





