फ़िरोज़ाबाद। नगर निगम के पॉलीवाल हॉल में गुरुवार को आयोजित सदन की बैठक उस समय हंगामेदार हो गई जब “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” को लेकर लाया गया निंदा प्रस्ताव चर्चा के लिए प्रस्तुत किया गया। महापौर कामिनी राठौर की अध्यक्षता में शुरू हुई बैठक में सत्तापक्ष और विपक्षी पार्षदों के बीच तीखी बहस छिड़ गई, जो जल्द ही नोक-झोंक और हंगामे में बदल गई। बैठक के दौरान भाजपा समर्थित पार्षदों और विपक्षी पार्षदों के बीच महिला आरक्षण को लेकर जोरदार बहस हुई। सत्तापक्ष ने इस अधिनियम को महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया, जबकि विपक्ष ने इसे राजनीतिक स्टंट करार देते हुए विरोध जताया।
महापौर कामिनी राठौर के नेतृत्व में महिला पार्षदों ने कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की और महिलाओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। महापौर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया यह कानून महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में समान अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2023 में संसद के दोनों सदनों से यह अधिनियम पारित हो चुका है, जिसमें लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है।
वहीं, सपा पार्षद मनोज शंखवार ने आरोप लगाया कि नगर निगम की बैठक में वीरांगना झलकारी बाई के नाम पर चौक निर्माण का प्रस्ताव शामिल नहीं किया गया, जो महिलाओं के सम्मान के विपरीत है। भाजपा पार्षद सुनील मिश्रा ने कहा कि सदन में महिला आरक्षण बिल का पारित होना सभी के लिए गर्व की बात है। अंततः हंगामे के बीच यह प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। बैठक में नगर आयुक्त प्रशांत नागर, उपसभापति केशवदेव कुशवाह समेत कई पार्षद, अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।





