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एनीमिया से लड़ाई में मीडिया की भूमिका अहम: अमित कुमार घोष

लखनऊ। अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने कहा कि एनीमिया बच्चों के संज्ञानात्मक विकास को प्रभावित करता है और उनकी सोचने-समझने की क्षमता को कमजोर कर देता है, जिससे दीर्घकाल में आर्थिक हानि भी होती है। उन्होंने एनीमिया के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाने में मीडिया की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया। यह बातें उन्होंने एनीमिया विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला में कहीं। कार्यशाला का उद्देश्य एनीमिया के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसके प्रभावी नियंत्रण एवं उपचार में मीडिया की भूमिका को सशक्त करना था।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने “एनीमिया मुक्त भारत अभियान” के तहत एनीमिया नियंत्रण को उच्च प्राथमिकता दी है। इस अभियान की 6x6x6 रणनीति जीवन के हर चरण में एनीमिया की रोकथाम और उपचार पर केंद्रित है, जिसमें शिशु, किशोर और गर्भवती महिलाएं प्रमुख रूप से शामिल हैं। अमित कुमार घोष ने जानकारी दी कि प्रदेश में आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से आयरन और फोलिक एसिड की खुराक, कृमिनाशक दवाएं, पोषण परामर्श और नियमित जांच की व्यवस्था को मजबूत किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 83.4 प्रतिशत प्रसव चिकित्सा संस्थानों में हो रहे हैं, जिससे माताओं और नवजात शिशुओं को सुरक्षित वातावरण मिल रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार जल्द ही मातृ एनीमिया के उन्नत निदान और उपचार की सुविधाएं शुरू करने जा रही है। नियमित जांच के लिए डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर का उपयोग किया जा रहा है, जबकि वर्ष 2026 में अंतःशिरा आयरन-फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज़ की 3.7 लाख खुराकें प्राप्त की गई हैं। यह मध्यम और गंभीर एनीमिया के लिए प्रभावी एकल खुराक उपचार है, जिसे गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित रूप से दिया जा सकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि केवल योजनाओं का विस्तार पर्याप्त नहीं है, बल्कि एनीमिया के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। समय पर पहचान और उपचार से मातृ मृत्यु दर, गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं और बच्चों के विकास में होने वाली समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। मीडिया से उन्होंने अपील की कि वह एनीमिया से जुड़े मिथकों को तोड़ने और जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाए। साथ ही सफल उदाहरणों को प्रमुखता से प्रस्तुत कर लोगों को समय पर जांच और उपचार के लिए प्रेरित करे। कार्यशाला में जिम्स के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता, महानिदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण हरिदास अग्रवाल, महानिदेशक प्रशिक्षण रंजना खरे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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