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आस्था के साथ जिम्मेदारी निभाकर बागपत बना मिसाल

बागपत। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश में बागपत का यमुना पक्का घाट रविवार को एक दुर्लभ, आध्यात्मिक अनुभूति का साक्षी बना। जैसे ही संध्या ढली, पूरा बागपत मानो भक्ति, रंग और प्रकाश से आलोकित हो उठा। दीपों की अनगिनत कतारें, भगवा आभा से सजे घाट, फूलों के सुसज्जित तोरण द्वार, वैदिक मंत्रों और गूंजते शंखनाद के बीच ‘यमुना महाआरती’ महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ।

रविवार देर शाम को बागपत के यमुना पक्का घाट पर जैसे ही आरती की पहली लौ प्रज्वलित हुई, तो यमुना के जल में उसकी झिलमिलाहट ने पूरे वातावरण को दिव्यता से भर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सदियों पुरानी परंपरा आधुनिक संकल्प के साथ पुनर्जीवित हो रही हो। घाट पर उपस्थित जनसमूह में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के चेहरों पर श्रद्धा के साथ एक अलग तरह का गर्व झलक रहा था। यह गर्व अपनी यमुना का था, अपनी संस्कृति का था और उस संकल्प का था, जो इस महोत्सव के माध्यम से पूरे बागपत में जागृत हो रहा है। जैसे ही बनारस से आमंत्रित किए गए आचार्यों ने वेद मंत्रों का उच्चारण आरंभ किया, वातावरण में एक गहन आध्यात्मिक कंपन अनुभव होने लगा। यज्ञ की सुगंध, मंत्रों की लय और आरती की लौ—इन सबने मिलकर ऐसा दृश्य रचा, जिसने उपस्थित जनसमूह को भीतर तक स्पर्श किया।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में धार्मिक आयोजनों को स्वच्छता, सुरक्षा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के साथ जोड़ने की जो दिशा विकसित हुई है, यमुना महाआरती उसका सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई। भक्ति और प्रकृति के भाव को आत्मसात करते हुए यह आयोजन एक ऐसे मॉडल के रूप में उभरा, जिसमें आस्था और पर्यावरण संरक्षण एक साथ चलते नजर आए। भगवा रंग से सजे घाट की भव्य सजावट, रंग-बिरंगी रोशनी और सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं ने इस आयोजन को एक दिव्य और अनुशासित स्वरूप प्रदान किया।

कार्यक्रम में शामिल हुए प्रदेश सरकार के वन, पर्यावरण, जंतु, उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री केपी मलिक तथा संसदीय कार्य एवं औद्योगिक विकास राज्यमंत्री एवं प्रभारी मंत्री जसवंत सिंह सैनी ने महाआरती में सहभागिता करते हुए नदियों को बचाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि यमुना हमारी सांस्कृतिक धरोहर है, जिसकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने बागपत की जनता की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा तय करते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनते हैं। यमुना महाआरती महोत्सव में आए सभी नागरिकों की जागरूकता की प्रशंसा की। सभी गणमान्य अतिथियों ने बागपत की समृद्धि, खुशहाली और यमुना की निर्मलता के लिए मंगलकामनाएं भी कीं। उन्होंने कहा कि अक्षय तृतीया जैसे पवित्र पर्व पर लिया गया संकल्प अक्षय फल देता है, इसलिए आज का यह यमुना को स्वच्छ और संरक्षित रखने का संकल्प आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर बनेगा।

जिलाधिकारी अस्मिता लाल के नेतृत्व में आयोजित इस महोत्सव को “जन-जागरूकता एवं जन-सहभागिता अभियान” के रूप में विकसित किया गया है। पहली बार इतने बड़े स्तर पर आयोजित यह कार्यक्रम पूर्णतः व्यवस्थित और प्रभावी नजर आया। जिलाधिकारी ने स्वयं तैयारियों की निगरानी कर यह सुनिश्चित किया कि आयोजन का हर पहलू—चाहे वह सुरक्षा हो, स्वच्छता हो या सांस्कृतिक प्रस्तुति—उच्च स्तर का हो। साथ ही श्रद्धालुओं से संवाद भी किया और पक्का घाट पर आस्था, भव्यता और दिव्यता से ओतप्रोत भक्तिमय बागपत देखने को मिला।

इस यमुना महाआरती की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यहां आस्था के साथ जिम्मेदारी का भाव भी उतनी ही मजबूती से जुड़ा हुआ दिखा। श्रद्धालुओं ने केवल आरती में भाग नहीं लिया, बल्कि यमुना को स्वच्छ रखने, कूड़ा न फैलाने और जल संरक्षण का संकल्प भी लिया। घाट पर श्रमदान और सफाई गतिविधियों ने इस संकल्प को व्यवहार में उतारने की दिशा भी दिखाई। यह दृश्य अपने आप में एक संदेश था कि परिवर्तन केवल शब्दों से नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास से आता है।

जिलाधिकारी ने कहा कि यदि इस आयोजन को सांस्कृतिक दृष्टि से देखा जाए, तो यह एक जीवंत परंपरा का पुनर्जागरण भी है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ी यमुना भारतीय जनमानस में आस्था और प्रेम की धारा रही है। बागपत, जो महाभारत कालीन भूभाग से जुड़ा है, यहां इस तरह का आयोजन उस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को फिर से जीवंत करता है। बनारस की टीम द्वारा विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, मंच पर प्रस्तुत भजन, लोकगीत और नृत्य-नाट्य ने इस विरासत को जीवंत रूप में सामने रखा, जिससे लोगों में अपनी जड़ों के प्रति जुड़ाव और गर्व की भावना और प्रबल हुई।

घाट की सजावट में भी भारतीयता के विविध रंग झलकते रहे। भगवा ध्वज, पुष्प सज्जा, पारंपरिक अलंकरण और आकर्षक प्रकाश व्यवस्था ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो बागपत अपनी सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक विरासत का सामूहिक उत्सव मना रहा हो। पहली बार इतने व्यापक स्तर पर आयोजित इस महोत्सव में नवाचार भी आकर्षण का केंद्र बने। ‘जीरो वेस्ट’ की अवधारणा को अपनाते हुए प्लास्टिक मुक्त आयोजन का प्रयास किया गया। वेस्ट प्लास्टिक से तैयार ‘नन्ही कली देसी डॉल’ जैसे मॉडल ने लोगों को यह संदेश दिया कि अपशिष्ट को भी सृजनात्मकता के माध्यम से उपयोगी बनाया जा सकता है। यह पहल विशेष रूप से युवाओं और बच्चों के बीच चर्चा का विषय रही और उन्होंने इसे उत्साहपूर्वक अपनाया।

इस अवसर पर पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिसोदिया, भाजपा जिला अध्यक्ष नीरज कुमार शर्मा, पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय, मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी विनीत कुमार उपाध्याय, शिवनारायण सिंह, एसडीएम मनीष यादव, ज्योति शर्मा, भावना सिंह, अमरचंद वर्मा आदि अधिकारी मौजूद रहे।

— विश्व बंधु शास्त्री

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