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बंगाल में जीत: 5 कारण जिनसे भाजपा ने ममता बनर्जी को हराया

राजीव रंजन नाग: नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में 200 पार सीटों की संख्या देखकर भारतीय जनता पार्टी सुखद रूप से हैरान थी। यह संख्या पार्टी के आंतरिक अनुमानों (185 से अधिक विधानसभा सीटें जीतने का अनुमान) से कहीं ज्यादा रही। भाजपा ने राज्य में अपनी इस शानदार जीत का श्रेय कई कारणों को दिया, जिन्हें पाँच प्रमुख श्रेणियों में बांटा जा सकता है। पार्टी के अनुसार “सुरक्षा” एक प्रमुख मुद्दा रहा—चाहे वह टीएमसी के 15 साल के शासन में कानून-व्यवस्था की स्थिति हो, या राज्य सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते और पेंशन से जुड़े मुद्दे, या फिर केंद्र के नेतृत्व में विकास।

1. महिलाओं के वोट
भाजपा का मानना है कि महिलाओं के वोट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। पिछले महीने एनडीए सरकार द्वारा विधायिका में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की कोशिशों से विपक्षी दलों के “महिला-विरोधी” होने का नैरेटिव मजबूत हुआ। पार्टी के एक मंत्री के अनुसार, महिलाओं का समर्थन भाजपा के पक्ष में कम से कम 5 प्रतिशत तक बढ़ा। राज्य में महिला मतदाताओं की संख्या लगभग पुरुषों के बराबर है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद कुल 6.44 करोड़ मतदाताओं में 3.28 करोड़ पुरुष और 3.16 करोड़ महिला मतदाता शामिल थीं।

2. सरकारी कर्मचारियों को लुभाना
सत्ता-विरोधी लहर, कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे और सातवें वेतन आयोग जैसे वादों ने बड़ा असर डाला। सूत्रों के मुताबिक, “20 से 50 लाख” मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग—जिसमें सरकारी कर्मचारी और नौकरी के इच्छुक युवा शामिल हैं—भाजपा की ओर आकर्षित हुआ। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सत्ता में आने के 45 दिनों के भीतर सातवां वेतन आयोग लागू करने और रिक्त पदों को भरने का वादा किया था।

3. केंद्र-नेतृत्व वाला विकास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनाम ममता बनर्जी का नैरेटिव भी भाजपा के पक्ष में गया। केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर भाजपा ने जोरदार अभियान चलाया। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 5.23 लाख पहली बार वोट देने वाले मतदाता और 20 से 29 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 1.31 करोड़ मतदाता इस बार अहम भूमिका में रहे। भाजपा ने इस वर्ग को विशेष रूप से लक्षित किया।

4. सुरक्षा और सत्ता-विरोधी लहर
राजनीतिक हिंसा के लिए चर्चित राज्य में भाजपा ने सुरक्षा को बड़ा मुद्दा बनाया। पार्टी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संगठन क्षमता और केंद्रीय बलों की तैनाती को भी महत्वपूर्ण बताया। चुनाव के दौरान 2.40 लाख केंद्रीय बलों की तैनाती की गई। चुनाव आयोग के अनुसार, मतगणना के बाद भी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 500 कंपनियाँ कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात रहीं।

5. SIR और ‘बाहरी लोगों’ का मुद्दा
भाजपा ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को भी अपनी जीत का एक कारण बताया। पार्टी का दावा है कि इससे “वास्तविक मतदाताओं” को ही मतदान का अवसर मिला। मतदाता सूची के शुद्धिकरण अभियान के तहत 27 लाख से अधिक नाम हटाए गए। 2021 के चुनावों की तुलना में इस बार 30 लाख से अधिक वोट पड़े।

यदि इन सभी कारकों को समग्र रूप से देखा जाए, तो भाजपा की यह जीत केवल एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा में संभावित बदलाव का संकेत भी मानी जा रही है।

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