≫ खराब सड़क और बत्ती गुल होने की समस्या से जनता परेशान
पवन कुमार गुप्ता: रायबरेली। जिले में पिछले सप्ताह आई तेज आंधी और तूफान के बाद बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। शहर से लेकर गांव तक विद्युत आपूर्ति बाधित होने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिले की कई विधानसभा क्षेत्रों के दर्जनों गांव अब भी अंधेरे में डूबे हुए हैं। वहीं ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में बिजली के खंभे टूटे पड़े हैं और ट्रांसफार्मर खराब होने के बावजूद मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो सका है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग के कर्मचारी और लाइनमैन शिकायतों के बावजूद मौके पर नहीं पहुंच रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि संविदा कर्मचारियों और लाइनमैन को बुलाने के लिए ग्रामीणों से खर्चा मांगा जा रहा है। टूटे खंभों और जमीन पर गिरे ट्रांसफार्मरों को ठीक कराने के लिए भी ग्रामीणों पर आर्थिक दबाव बनाया जा रहा है।
बिजली संकट के कारण गांवों में जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। मोबाइल चार्ज न होने से संचार व्यवस्था बाधित है, बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं और लोग रातभर जागकर समय बिताने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आपदा के समय जनप्रतिनिधियों को जनता के बीच होना चाहिए, लेकिन उनकी अनुपस्थिति से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
गौरतलब है कि रायबरेली प्रदेश का वीवीआईपी जिला माना जाता है और जिले से सरकार में दो मंत्री भी हैं, इसके बावजूद आपदा के बाद हालात सामान्य होने में काफी समय लग रहा है। वहीं रायबरेली और ऊंचाहार क्षेत्र की सड़कों की हालत भी बदहाल बनी हुई है। गांवों के साथ-साथ हाईवे पर भी जगह-जगह गड्ढे हैं। योगी सरकार द्वारा सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने के दावे अब तक जमीन पर पूरी तरह उतरते नहीं दिख रहे हैं।
हालांकि प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और ऊंचाहार विधायक डॉ. मनोज पांडेय ने अपनी विधानसभा क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बहाल करने और सुधार कार्य में तेजी लाने के लिए ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखा है। इसके बावजूद बिजली विभाग की कार्यप्रणाली में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई दे रही है। वहीं हरचंदपुर विधायक राहुल लोधी ने भी पावर कॉर्पोरेशन अधिकारियों से मुलाकात कर जल्द विद्युत आपूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी हालात सामान्य नहीं हो सके हैं।





