नेहा बी.टेक कर चुकी थी और नौकरी के लिए कोशिश कर रही थी, वहीं उसकी सहेली कामिनी एक कॉलेज में प्रोफेसर थी। नेहा को रील बनाने का बहुत शौक था। हर गाने या कोट्स पर वह रील बनाती रहती थी। वह महत्वाकांक्षी और एटीट्यूड वाली होने के साथ-साथ अपनी एक अलग पहचान भी बनाना चाहती थी। जबकि कामिनी का लक्ष्य निर्धारित था और वह अपनी गति से आगे बढ़ रही थी। नेहा बाहर जाने के लिए कामिनी का इंतजार कर रही थी।
नेहा:- “कब से तुम्हारा वेट कर रही हूं? कॉलेज से कब फ्री होगी?”
कामिनी:- “अभी आधा घंटा और लगेगा और सुन… यार कल मॉल चलेंगे। वैसे भी मैं बहुत थक गई हूं और मूड भी नहीं है जाने का।”
नेहा:- “यार! सारा प्लान चौपट कर दिया! ठीक है, फिर कभी चलेंगे।”
कामिनी:- “सॉरी,” और फोन कट कर देती है।
नेहा सोचने लगती है कि कामिनी आजकल अपने आप को ज्यादा बिजी बता रही है या वह वाकई में बहुत बिजी है? कहीं वह मुझे इग्नोर तो नहीं कर रही है?
सोते-सोते वह मोबाइल की स्क्रीन स्क्रोल कर रही थी तभी उसके मोबाइल पर मोटिवेशनल कोट्स आने लगे। रील्स देखने की खास बात यह है कि यदि आप कुछ सेकंड के लिए एक रील देखते हैं तो उसी से रिलेटेड रील्स आपके मोबाइल स्क्रीन पर आने लगती हैं। अब आजकल नेहा को भी वैसी ही रील्स दिखाई देने लगीं—कि यदि कोई व्यक्ति आपको इग्नोर कर रहा हो तो आप लड़ो मत, साइलेंट होकर दूर हो जाओ और अपनी इज्जत कैसे बढ़ाएं, अपना औरा कैसे बढ़ाएं, अपनी वैल्यू कैसे बढ़ाएं। बहुत भावुक मत बनो, नहीं तो अकेले रह जाओगे वगैरह-वगैरह। इस तरह की रील्स उसके मन को भटकाने लगीं।
नेहा ना चाहकर भी कामिनी को तौलने लगी क्योंकि कामिनी पिछले कुछ समय से बहुत ज्यादा व्यस्त रहने लगी थी। अब नेहा ने कामिनी को फोन करना बंद कर दिया। कुछ समय बाद कामिनी ने नेहा को फोन किया।
कामिनी:- “यह नेहा मेरा फोन क्यों नहीं उठा रही है? ऐसा करती तो नहीं है वह! आएगा कॉल बैक!” लेकिन नेहा का फोन नहीं आता है। कामिनी ने फिर से फोन लगाया। दो बार रिंग जाने के बाद नेहा ने फोन उठाया।
कामिनी:- “अरे! कहां है तू? कब से फोन लगा रही हूं? कल संडे है, फिनिक्स मॉल चलें क्या? पहले मूवी, फिर शॉपिंग, फिर खाना खाकर घर आ जाएंगे।”
नेहा:- “नहीं! कल मैं बिजी हूं।”
कामिनी:- “लो अब तुम बिजी हो गई? कहां जा रही हो?”
नेहा:- “कहीं नहीं! पेंडिंग काम है, वही निपटाना है।”
कामिनी:- “अरे, वो तो अगले दिन कर लेना, फिर मुझे समय नहीं मिलेगा।”
नेहा:- “हां, तो तुम्हारे समय के हिसाब से मैं नहीं चल सकती। जब तुम कहो चलो, तब चलें; जब तुम ना बोलो, तो मत जाओ।”
कामिनी:- “क्या हो गया है नेहा? तुम्हें तो अच्छे से पता है कि मैं कॉलेज जाती हूं और जल्दी फ्री नहीं हो पाती हूं। मैंने तुझे कब मना किया है, जरा बताओ।”
नेहा:- “पता नहीं! कल मैं फ्री नहीं हूं,” और वह फोन काट देती है।
कामिनी सोचने लगी कि नेहा आजकल स्टेटस भी कुछ अजीब से रखने लगी है। क्या हो गया है इसे?
कामिनी अगले दिन नेहा से मिलने पहुंच गई और उसके लिए मनपसंद चीज़ का केक साथ लेकर गई।
कामिनी:- “हेलो आंटी! कैसे हो आप? नेहा कहां है?”
आंटी:- “ठीक हूं बेटा! तुम कैसी हो? आजकल जल्दी आती नहीं हो। कितना बिजी हो गई हो बेटा?”
कामिनी:- “हां आंटी, इन दिनों समय जरा कम मिल पा रहा है।”
आंटी:- “कोई बात नहीं! रूम में जाओ, अंदर बैठी है वह।”
कामिनी:- “जी आंटी।”
कामिनी:- “तुम यहां बैठी क्या कर रही हो? लो तुम्हारे लिए चीज़ केक लाई हूं।”
नेहा:- “अरे तुम! आओ आओ! आज तुम्हें कैसे समय मिल गया?”
कामिनी:- “अच्छा, तो यह मामला है मैडम के नाराज होने का! तुम्हें तो पता ही है कि एग्जाम टाइम पर काम का लोड बढ़ जाता है। पेपर चेक करना, मार्कशीट बनाना वगैरह रहता है, तो उस समय बहुत बिजी हो जाती हूं मैं। खाने के लिए भी फुर्सत नहीं मिलती है मुझे। फिर भी तुम ऐसा सोचती हो।”
नेहा:- “हां यार! तुमने मना कर दिया तो मन खिन्न हो गया था। इस समय मोबाइल पर भी कुछ ऐसे ही विचार दिखाई देने लगे तो मन और भ्रमित हो गया।”
कामिनी:- “पगली है! चलो मॉल चलते हैं। जब भी मुझे समय मिलता है, मैं तुम्हारे पास आ जाती हूं। मन नहीं होता मेरा, लेकिन तेरी खुशी के लिए रील बनाती हूं। अब और क्या कैसे करूं?” और वह हंसने लगती है। “चलो तैयार हो जाओ, चलते हैं बाहर।”
नेहा:- “बस! अभी आई।” और दोनों मॉल जाने के लिए निकल जाती हैं।
कामिनी:- “देखो नेहा! सोशल मीडिया की दुनिया असली जिंदगी नहीं है। मुझे लगता है कि सोशल मीडिया पर इस तरह के मैसेज लोगों को सेल्फ-सेंटर्ड बना रहे हैं। ये मैसेज लोगों को आपस में दूर कर रहे हैं, साथ ही लोगों में ईगो बढ़ा रहे हैं। अपने ही रिश्तेदारों, भाई-बहनों, दोस्तों और करीबियों से दूर कर रहे हैं। जो भी लोग आज आपके जीवन से जुड़े हैं, उनके साथ कभी खुशी, कभी दुख, कभी लड़ाई तो कभी मनमुटाव रहेंगे—यही जिंदगी है। व्यक्ति इन्हीं लोगों के बीच रहकर सीखता है कि उसे किसके साथ कैसे रहना है, कैसा व्यवहार करना है। सोशल मीडिया वास्तविक जीवन नहीं है, तो मैडम अपने मोबाइल पर ज्यादा भरोसा मत किया करो।”
नेहा:- “जो आज्ञा, देवी!” आपकी बात सही है और मुझसे गलती हो गई।” हंसते हुए नेहा कहती है।
- प्रियंका वर्मा माहेश्वरी, गुजरात




