हवा दिन की विषैली हो रही है
नगर की शाम मैली हो रही है
प्रदूषण दायरे में आ रहे सब
ज़मीं अब विष की थैली हो रही है
बड़ी जनता की उलझन हो रही नित
चुनावों में जो रैली हो रही है
मवाली और गुंडे की थी कल तक
वही लीडर की शैली हो रही है
जिसे जन्नत कहे थे कल तक सब
जहन्नुम जैसी वैली हो रही है
- हमीद कानपुरी, अब्दुल हमीद इदरीसी
मीरपुर, कैंट, कानपुर



