जिस मोती में आब नहीं
तो फिर वो नायाब नहीं
जीवन उसका क्या जीवन
जिस के कोई ख्वाब नहीं
उसको गुलशन कहना मत
सब्ज़ नहीं शादाब नहीं
कैसे कह दूँ यार भला
गर उस में आदाब नहीं
मिलने की है चाह मगर
इतना भी बेताब नहीं
- हमीद कानपुरी
अब्दुल हमीद इदरीसी, मीरपुर कैण्ट, कानपुर




