अवनीश सिंह: कानपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी नमामि गंगे मिशन के तहत गंगा नदी को निर्मल और अविरल बनाने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं और इस पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके बावजूद कानपुर में पांडु नदी की ओर जा रहे झागयुक्त डिस्चार्ज को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
मामला कानपुर के बिनगंवा स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जुड़ा है, जहां आउटलेट से निकल रहे झागयुक्त और गंदे पानी की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि यह पानी आगे चलकर पांडु नदी और फिर गंगा में मिल जाता है, जिससे पूरी नदी प्रणाली की स्वच्छता पर असर पड़ सकता है। यह STP कानपुर रिवर मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित किया जा रहा है, जिसे शापूरजी ग्रुप से जुड़ी परियोजना कंपनी बताया जाता है। संयंत्र का उद्देश्य सीवर जल का शोधन कर मानक के अनुरूप साफ पानी छोड़ना है, लेकिन आउटलेट की स्थिति को लेकर उसकी कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से झागयुक्त पानी निकल रहा है, जबकि परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। इस स्थिति ने STP की कार्यक्षमता, रखरखाव और पर्यवेक्षण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों ने मांग की है कि डिस्चार्ज जल की BOD, COD, TSS सहित सभी गुणवत्ता मानकों की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए। उनका कहना है कि पारदर्शिता के बिना वास्तविक स्थिति का आकलन संभव नहीं है।
चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि पांडु नदी के किनारे बड़े पैमाने पर कृषि कार्य होता है, जहां गेहूं, धान, आलू और सब्जियों की खेती की जाती है। यदि नदी का जल प्रदूषित होता है तो इसका असर कृषि उत्पादन, मिट्टी की गुणवत्ता और मानव स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि STP मानकों के अनुसार संचालित है, तो फिर आउटलेट पर लगातार दिखाई देने वाले झाग और प्रदूषण का कारण क्या है, और क्या संबंधित विभाग इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करेंगे।





