कानपुर नगर। विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर AURA Trust की ओर से पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, जल संरक्षण, वृक्षारोपण तथा स्वास्थ्य और पर्यावरण के संबंध पर आधारित विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। संस्था का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी प्रयासों तक सीमित न रखकर जन-जन का सामाजिक आंदोलन बनाना है। AURA Trust की संस्थापक एवं एम.डी. (मेडिसिन) गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. अमरीन फ़ातिमा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत बचपन से ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “जब एक बच्चा अपने हाथों से पौधा लगाता है, तब वह केवल एक पेड़ नहीं लगाता, बल्कि भविष्य के प्रति जिम्मेदारी का बीज बोता है।”
उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं है कि पृथ्वी को हमारी आवश्यकता है या नहीं, बल्कि यह है कि मानव जीवन पृथ्वी और उसके प्राकृतिक संसाधनों पर पूरी तरह निर्भर है। पृथ्वी हमारे बिना जीवित रह सकती है, लेकिन हम पृथ्वी के बिना नहीं रह सकते। डॉ. फ़ातिमा ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि यदि हम आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देना चाहते हैं तो उन्हें केवल भौतिक संपत्ति ही नहीं, बल्कि स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और हरा-भरा पर्यावरण भी विरासत में देना होगा।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उन्होंने सभी नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधा लगाए, जल की प्रत्येक बूंद का सम्मान करे, प्लास्टिक के उपयोग को कम करे, प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील बने तथा पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाए। अपने संदेश के अंत में डॉ. अमरीन फ़ातिमा ने कहा, “धरती हमारी अमानत है, संपत्ति नहीं। हमें यह अपने पूर्वजों से विरासत में नहीं मिली, बल्कि आने वाली पीढ़ियों से उधार मिली है।”
उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना ही आने वाले समय में मानवता के सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की आधारशिला बनेगी। उनका मानना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं और यही संतुलन आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ, सुरक्षित और सुंदर संसार प्रदान करेगा। डॉ. फ़ातिमा ने अपने संदेश का समापन इन शब्दों के साथ किया— “प्रकृति बचेगी तो संस्कृति बचेगी, संस्कृति बचेगी तो मानवता बचेगी।”










