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निबंधन विभाग के निजीकरण और ई-रजिस्ट्री के विरोध में अधिवक्ताओं का आंदोलन जारी, 21वें दिन भी कलमबंद हड़ताल

हाथरस। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निबंधन विभाग के प्रस्तावित निजीकरण और ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं एवं टाइपिस्टों का संयुक्त आंदोलन मंगलवार को 21वें दिन भी जारी रहा। उप-पंजीयन कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन करते हुए आंदोलनकारियों ने अपनी कलमबंद हड़ताल को आगे भी जारी रखने का निर्णय लिया। आंदोलन के दौरान हुई आपात बैठक में महानिरीक्षक निबंधन एवं स्टाम्प द्वारा एक पत्र वापस लिए जाने के मुद्दे पर चर्चा की गई। इसके बाद सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि कलमबंद हड़ताल 3 जुलाई तक जारी रहेगी।

दि बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डी.के. चौहान ‘शोला’ एडवोकेट ने कहा कि यह आंदोलन अधिवक्ताओं के साथ-साथ आम जनता के हितों की रक्षा के लिए किया जा रहा है। वहीं सचिव राजेश बघेल एडवोकेट ने सरकार के विरोध में “बुद्धि-शुद्धि यज्ञ” और थाली बजाकर प्रदर्शन करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने प्रदेशभर की बार एसोसिएशनों, कातिब संघों और टाइपिस्ट संघों से आंदोलन को व्यापक समर्थन देने की अपील भी की। धरने में युवराज सिंह चौहान, महेंद्र सिंह यादव, जयप्रकाश गुप्ता, महेश चंद्र अंजाना, जितेंद्र कुमार, रमेश चंद्र शर्मा, अरविंद कुमार शर्मा, रविंद्र यादव, रंजीत पौरुष, गिरीश यादव, विजय उपाध्याय, भगवान सिंह, रूपेंद्र बघेल, प्रियांशु दरगढ़, दीपेश पाठक, सत्यवीर सिंह यादव, श्यामरूप यादव, तौकीर खान, नवनीत जैन, आनंद कुमार, देवेंद्र कुमार संत, संजीव यादव, धनीराम सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता और कातिब मौजूद रहे।

उधर सासनी तहसील में भी ई-रजिस्ट्री प्रणाली के विरोध में अधिवक्ताओं का धरना जारी रहा। दी बार एसोसिएशन सासनी के अध्यक्ष महेंद्र सिंह ने कहा कि ई-रजिस्ट्री से संबंधित हालिया पत्र अधिवक्ताओं के हितों के खिलाफ है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक शासन विवादित आदेश वापस नहीं लेता और मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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