कानपुर। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद त्रिपाठी की पावन स्मृति में के.डी. ए. मार्केट, एच-2 ब्लॉक, किदवई नगर में काव्योत्सव एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि अशोक शास्त्री ने की, जबकि संचालन युवा कवि अभिषेक “सागर” ने किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में शरद त्रिपाठी, अतिरिक्त जिला जज (माती), कानपुर देहात उपस्थित रहे। समारोह की शुरुआत डॉ. अरुण तिवारी “गोपाल” द्वारा सरस्वती वंदना से हुई। काव्योत्सव में कवि डॉ. प्रदीप त्रिपाठी ने अपनी रचना
“धरती छोटी, झुका आसमान, मुट्ठी में संसार, पिता जब तक संग में रहता, होते सभी स्वप्न साकार”
प्रस्तुत की, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। वरिष्ठ कवि अशोक शास्त्री ने पिता की स्मृतियों को उकेरते हुए अपनी रचना
“जिस घर की चौपालों पर लगते रोज ठहाके, आज वहीं पर एक उदासी आ कर तांके-झांके”
पेश की, जिसने वातावरण को संवेदनशील बना दिया।
कवि डॉ. दीपकुमार शुक्ल ने रचना
“मात-पिता बिन घर है सूना, सूना यह संसार, सारे रिश्ते नाते सूने, सूना जग व्यवहार”
से जमकर वाह-वाही लूटी। बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने अपनी ओजस्वी कविताओं से राष्ट्रप्रेम की अलख जगाई, जबकि राजेश सिंह की वैचारिक कविताएँ भी बहुत सराही गईं। इस अवसर पर डॉ. विद्या शंकर दीक्षित, डॉ. मनोज अग्रवाल (अतर्रा), डॉ. अनिल उमराव, राम किशन कश्यप “राम”, विदुषी त्रिपाठी, प्रज्ञांश त्रिपाठी, अनिल अवस्थी (साजन), अखिलेश चंद्र मिश्र, गोपाल मिश्र, संतोष कटियार, राम गोपाल जायसवाल सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आगंतुकों के प्रति आभार श्रीमती ज्योति त्रिपाठी ने व्यक्त किया।





