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बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में हुआ संवाद सत्र का आयोजन

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल की ओर से वरिष्ठ शिक्षाविदों, तकनीकी कार्यक्रम समिति के सदस्यों तथा एएनआरएफ, दिल्ली के कार्यक्रम अधिकारियों के परस्पर हुआ संवाद सत्र का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के तौर पर जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय एवं कश्मीर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. तलत अहमद उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मंच पर आईआईटी दिल्ली के प्रो. दिलीप गांगुली, अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के साइंटिस्ट ई डॉ. प्रहलाद राम, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डीन‌ ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू एवं डॉ. जीवन सिंह उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं बाबासाहेब के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। विश्वविद्यालय कुलगीत के पश्चात आयोजन समिति की ओर से अतिथियों को पुष्पगुच्छ भेंट करके उनका स्वागत किया गया।
‌ जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय एवं कश्मीर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. तलत अहमद ने अपने विस्तृत वक्तव्य में एएनआरएफ द्वारा प्रदान की जाने वाली विभिन्न प्रकार की ग्रांट्स पर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने यह भी बताया कि इन ग्रांट्स को प्राप्त करने की प्रक्रिया पारदर्शी, संरचित और योग्यता आधारित है, जिसमें प्रस्ताव की गुणवत्ता, शोध का सामाजिक व वैज्ञानिक महत्त्व और उसकी संभावित उपयोगिता को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है। उन्होंने ए एन आर एफ की कार्यप्रणाली, इसकी मूल्यांकन प्रणाली और विभिन्न विषय क्षेत्रों में उपलब्ध शोध अवसरों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला, जिससे विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों को इस पहल का व्यापक दृष्टिकोण समझने में सहायता मिली। प्रो. अहमद ने बताया कि अनुसंधान प्रक्रिया में वैज्ञानिकों के साथ-साथ गैर-वैज्ञानिक पेशेवरों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी भी बड़े शोध प्रोजेक्ट के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक, तकनीकी और प्रबंधकीय सहयोग आवश्यक होता है। तलत अहमद सर ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे में देश के युवाओं को शोध क्षेत्र की ओर प्रेरित करना और उन्हें उपयुक्त मार्गदर्शन देना शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि ए एन आर एफ न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करता है, बल्कि बहु-विषयक सहयोग को भी बढ़ावा देता है, जिससे विज्ञान, तकनीक, समाज और नीति-निर्माण सभी एक साझा लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते हैं। साथ ही उन्होंने सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि भारत के शोध परिदृश्य में युवा शोधकर्ता सबसे बड़ी ताकत हैं और ए एन आर एफ जैसे मंच उनके सपनों को वास्तविक रूप देने की महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आईआईटी दिल्ली के प्रो. दिलीप गांगुली ने पर्यावरणीय सततता की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा कि आज के समय में यह केवल एक विचार मात्र नहीं, बल्कि एक मजबूत प्रतिबद्धता की माँग करती है। उन्होंने बताया कि सतत विकास को प्राप्त करने के लिए संस्थानों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं को मिलकर क्षमता निर्माण पर ध्यान देना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ पर्यावरण संरक्षण से जुड़े जटिल मुद्दों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझकर उनका समाधान कर सकें। उन्होंने कहा कि सतत विकास के उद्देश्यों को केवल योजनाओं में सीमित करने के बजाय उन्हें एक सार्थक और उपयोगी तरीके से लागू करना होगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के परिणाम ज़मीनी स्तर पर दिखाई दें।
प्रो. गांगुली ने बताया कि इन चुनौतियों को प्रभावी ढंग से हल करने के लिए अनुसंधान और विकास की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। क्योंकि आधुनिक तकनीकों, डेटा-संचालित समाधानों और नवाचार-आधारित परियोजनाओं के बिना न तो पर्यावरणीय समस्याओं को समझा जा सकता है और न ही उनके दीर्घकालिक समाधान विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जब वैज्ञानिक अनुसंधान, नीति-निर्माण और समाज की भागीदारी एक साथ आती है, तब ही पर्यावरण सुरक्षा के लक्ष्यों को वास्तविक अर्थों में प्राप्त किया जा सकता है।
अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के साइंटिस्ट ई डॉ. प्रहलाद राम ने अपने व्यक्तव्य‌ में सरकार द्वारा विकसित अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की आवश्यकता, उद्देश्य और उपयोगिता पर गहन जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि यह संस्थान देश में अनुसंधान को सुदृढ़ करने, युवा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहन देने और वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक महत्त्वपूर्ण पहल है।‌‌ डॉ. प्रहलाद ने बताया कि ।छत्थ् के माध्यम से सरकार युवाओं को न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि उन्हें अत्याधुनिक अनुसंधान संरचना, मेंटरशिप, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से जुड़ने के अवसर और बहु-विषयक परियोजनाओं पर काम करने का मंच भी उपलब्ध कराती है। इसके अतिरिक्त उन्होंने ई-महा मिशन प्रोग्राम का विशेष उल्लेख किया, जिसका‌ उद्देश्य भारत में विज्ञान, तकनीक, सामाजिक-विज्ञान, पर्यावरण एवं नवाचार आधारित शोध को एकीकृत करना है, ताकि देश की प्राथमिक चुनौतियों का समाधान वैज्ञानिक दृष्टिकोण से किया जा सके। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान समय में अनुसंधान केवल शैक्षणिक आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार बन चुका है। इसलिए युवाओं को चाहिए कि वे नई तकनीकों, आधुनिक उपकरणों और बहु-विषयक दृष्टिकोण को अपनाते हुए शोध कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू ने अपने संबोधन में कहा कि अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन देश में शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट और दूरदर्शी कार्य कर रहा है, जिसने न केवल अनुसंधान को एक नई दिशा दी है, बल्कि युवा शोधकर्ताओं के लिए अधिक अवसरों और संसाधनों के द्वार भी खोले हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ए एन आर एफ की पहलें विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिक समुदाय और समाज सभी को जोड़कर एक सशक्त शोध-पर्यावरण तैयार कर रही हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने आश्वासन दिया कि हमारी विश्वविद्यालय परिवार अपनी ओर से पूर्ण सहयोग, सक्रिय भागीदारी और आवश्यक अकादमिक समर्थन देने का निरंतर प्रयास करेगी, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान को और अधिक गति तथा प्रभावशीलता प्रदान की जा सके। उन्होंने सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि संस्थान और ए एन आर एफ मिलकर तभी सार्थक परिवर्तन ला सकते हैं, जब सभी मिलकर शोध, नवाचार और ज्ञान-विस्तार के प्रति समर्पित रहें।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न शिक्षकों द्वारा ए एन आर एफ द्वारा प्रदान की जाने वाली ग्रांट्स से जुड़े व्यापक पहलुओं जैसे पात्रता, मूल्यांकन प्रक्रिया, शोध प्रस्ताव की गुणवत्ता और उसके प्रभाव‌ से संबंधित विषयों पर प्रश्न पूछे गये। अतिथिगणों ने इन सभी प्रश्नों का न केवल विस्तारपूर्वक उत्तर दिया, बल्कि उदाहरणों और अनुभवों के माध्यम से प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं को और भी स्पष्ट किया। चर्चा के दौरान ग्रांट प्राप्त करने की प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों जैसे दस्तावेज़ीकरण, शोध प्रस्ताव की संरचना, समयसीमा, संसाधनों तक पहुँच और अंतर्विषयी सहयोग की आवश्यकता पर भी विमर्श किया गया। अंत में डॉ. सुभाष मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
समस्त कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

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