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रायबरेली में भी कफ सिरप की पकड़ी गई कालाबाजारी

➥ तीन फार्मो के खिलाफ अलग-अलग थानों में दर्ज कराई गई FIR
➥ आरोपी मेडिकल कारोबारी फरार, पुलिस कर रही तलाश

रायबरेली। कफ सिरप तस्करी का जाल रायबरेली में भी फैला हुआ है। जिले में 75 लाख रुपए से अधिक कफ सिरप की कालाबाजारी पकड़ी गई है। उन्नाव में जिस मेडिकल स्टोर को कफ सिरप बेचने के कागज प्रस्तुत किए गए, जांच में वहां कोचिंग चलती पाई गई। एक फर्म ने तो लाइसेंस निलंबित होने के बावजूद लाखों की सिरप अवैध तरीके से बेच दी। ड्रग इंस्पेक्टर ने तीन मेडिकल व्यापारियों के खिलाफ अलग-अलग थानों में FIR दर्ज कराई है। दो कारोबारी फरार हैं। लखनऊ की दो कंपनियों ने जिले की अजय फार्मा और पाल मेडिकल को बीते 2 वर्षों में करीब कफ सिरप की 6 लाख से अधिक बोतल सप्लाई करना दिखाया है। इन दोनों फर्मों ने रायबरेली के सेमरी कस्बे में दवा का कारोबार करने वाले मेडिसिन हाउस के साथ ही लखनऊ, उन्नाव और बहराइच में कागजों पर कफ सिरप बेच दिया। शक होने पर ड्रग इंस्पेक्टर शिवेंद्र सिंह ने अजय फार्मा, पाल मेडिकल और मेडिसिन हाउस के दवा कारोबार से संबंधित कागज तलब किए। जांच में सामने आया कि शहर के कल्लू का पुरवा में संचालित अजय फार्मा ने मेडिसिन हाउस के साथ-साथ लखनऊ, उन्नाव और बहराइच की कई फर्मों को कफ सिरप की सप्लाई दी। अजय फार्मा ने उन्नाव की जिस लक्ष्मी मेडिकल नाम की फर्म को कफ सिरप सप्लाई करने का कागज प्रस्तुत किया, वहां उन्नाव के ड्रग इंस्पेक्टर से कराई गई जांच में संबंधित पते पर मेडिकल स्टोर के बजाए कोचिंग चलती पाई गई। डीआई के मुताबिक, पाल मेडिकल का लाइसेंस पिछले साल निलंबित कर दिया गया था लेकिन संचालक इसके बावजूद दवा का कारोबार कर रहा था। ड्रग इंस्पेक्टर शिवेंद्र सिंह का कहना है कि तीनों फर्मों द्वारा कफ सिरप का कारोबार केवल कागजों पर ही किया गया और सारी सप्लाई प्रदेश के दूसरे जनपदों और नेपाल को भेज दी गई। पुलिस के साथ-साथ तीनों मेडिकल फार्मो के संचालकों के खिलाफ विभागीय जांच जारी है। जल्दी ही फरार संचालकों के पकड़े जाने की संभावना जताई जा रही है।

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