
नई दिल्ली। 23वें भारत–रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच विस्तृत उच्चस्तरीय वार्ताएँ हुईं। पुतिन चार साल बाद भारत की दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर आए। दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, विज्ञान, शिक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु सहयोग और सांस्कृतिक आदान–प्रदान जैसे प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। बैठक के दौरान कुल 16 समझौतों और कई घोषणाओं पर हस्ताक्षर किए गए।
भारत–रूस संबंध: ध्रुव तारे जैसी स्थिरता
हैदराबाद हाउस में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद PM मोदी ने कहा कि भारत–रूस मित्रता “ध्रुव तारे की तरह स्थिर और समय की कसौटी पर खरी उतरी है।” पुतिन ने PM मोदी को 2026 में रूस में होने वाले 24वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया। PM मोदी ने पुतिन का 7, लोक कल्याण मार्ग पर स्वागत किया और उन्हें रूसी भाषा में भगवद्गीता की प्रति भेंट की।

दोनों नेताओं ने 25 वर्षों से जारी विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देश बहुध्रुवीय दुनिया और एशिया में स्थिरता तथा वैश्विक शांति के लिए साथ मिलकर कार्य करेंगे।
16 प्रमुख समझौते: मुख्य बिंदु
1. प्रवासन और गतिशीलता
- अस्थायी श्रमिकों की तैनाती पर समझौता
- अनियमित प्रवासन से निपटने में सहयोग
2. स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा
- स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा व अनुसंधान सहयोग
- खाद्य सुरक्षा और मानक सहयोग पर समझौता
3. समुद्री और ध्रुवीय जलक्षेत्र सहयोग
- ध्रुवीय जलक्षेत्र में कार्यरत जहाजों के विशेषज्ञों के प्रशिक्षण पर MoU
- भारत–रूस समुद्री बोर्ड के बीच समझौता
4. उर्वरक क्षेत्र
- भारतीय कंपनियों और रूस की यूरालकेम सहित विभिन्न इकाइयों के बीच MoU
5. सीमा शुल्क और वाणिज्य
- पूर्व–आगमन सूचना साझा करने पर प्रोटोकॉल
- भारतीय डाक विभाग और रूसी पोस्ट के बीच द्विपक्षीय समझौता
6. शैक्षणिक सहयोग
- रक्षा उन्नत प्रौद्योगिकी संस्थान–टॉम्स्क स्टेट यूनिवर्सिटी MoU
- मुंबई विश्वविद्यालय–मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी–RDIF के बीच सहयोग समझौता
7. मीडिया साझेदारी
प्रसार भारती और रूस की कई मीडिया संस्थाओं के साथ सहयोग:
- गज़प्रोम मीडिया
- नेशनल मीडिया ग्रुप
- बिग एशिया
- टीवी-नोवोस्ती
- टीवी ब्रिक्स
- आदि
मुख्य घोषणाएँ
- भारत–रूस आर्थिक सहयोग के 2030 कार्यक्रम को मंजूरी
- रूस का इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) में शामिल होने का निर्णय
- कला प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक आदान–प्रदान के समझौते
- रूसी नागरिकों के लिए 30 दिन का निःशुल्क e-Tourist Visa
- निःशुल्क समूह पर्यटक वीज़ा
प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष फोकस
व्यापार और आर्थिक साझेदारी
- 2030 तक व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य
- राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा
- भुगतान प्रणालियों और डिजिटल मुद्रा प्लेटफॉर्म की इंटरऑपरेबिलिटी पर कार्य
- उर्वरक, ऊर्जा, खनन और उच्च तकनीकी उद्योगों में G2G और B2B सहयोग
ऊर्जा सहयोग
- तेल, गैस, एलएनजी, पेट्रोकेमिकल्स और कोयला गैसीकरण में संयुक्त परियोजनाएँ
- निवेश परियोजनाओं को शीघ्रता से आगे बढ़ाने पर सहमति
परिवहन और संपर्क
- INSTC, चेन्नई–व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारा, और नॉर्दर्न सी रूट पर सहयोग
- भारत और रूस के रेलवे के बीच तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा
परमाणु ऊर्जा
- कुडनकुलम परमाणु परियोजना की प्रगति पर
- भारत में दूसरे रूसी परमाणु संयंत्र स्थल पर चर्चाओं को तेज करने पर सहमति
- VVER रिएक्टरों, ईंधन और उपकरणों के स्थानीय उत्पादन पर चर्चा
अंतरिक्ष सहयोग
- मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम
- रॉकेट इंजन तकनीक
- उपग्रह नेविगेशन
- ग्रहों की खोज और संयुक्त अनुसंधान
सैन्य और सैन्य-तकनीकी सहयोग
- ‘Make in India’ के तहत संयुक्त निर्माण, तकनीकी हस्तांतरण और R&D पर जोर
- संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘इंद्र’ को और बढ़ाने की प्रतिबद्धता
- रूस-निर्मित रक्षा उपकरणों के भारत में रखरखाव हेतु संयुक्त निर्माण
बहुपक्षीय सहयोग
- रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का दृढ़ समर्थन दोहराया
- G20, BRICS और SCO में सहयोग को मजबूत करने पर सहमति
- जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और वैश्विक दक्षिण के मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण
आतंकवाद के खिलाफ भारत–रूस का संयुक्त रुख
दोनों देशों ने आतंकवाद पर कड़े कदम उठाने का आह्वान किया और
- मॉस्को (2024) और पहलगाम (2025) आतंकी हमलों की कड़ी निंदा की
- आतंकवादी वित्तपोषण, सीमा पार आतंकवाद और ऑनलाइन कट्टरपंथ रोकने पर संयुक्त कार्य की घोषणा की
- UN वैश्विक आतंकवाद-रोधी रणनीति के पूर्ण कार्यान्वयन पर जोर दिया
23वां भारत–रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक निर्भरता और बहुआयामी सहयोग का प्रतीक रहा। 16 समझौते और कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ यह दर्शाती हैं कि दोनों देश आने वाले दशकों तक रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, विज्ञान, शिक्षा, अंतरिक्ष और वैश्विक मंचों पर एक–दूसरे के महत्वपूर्ण साझेदार बने रहेंगे।





