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एम्स रायबरेली की टीम की सफलता: विवेक ने खोई हुई चाल वापस पाई

रायबरेली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायबरेली ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान ने पहली बार कुशिंग (Cushing) पिट्यूटरी ट्यूमर से पीड़ित एक मरीज की सफल सर्जरी कर नया कीर्तिमान स्थापित किया। सर्जरी को न्यूरोसर्जरी, एनेस्थीसिया और एंडोक्राइन मेडिसिन विभाग की संयुक्त टीम ने संपन्न किया।

मरीज के दिमाग में पिट्यूटरी ट्यूमर पाया गया था, जिससे कोर्टिसोल हार्मोन का अत्यधिक उत्पादन हो रहा था। कुशिंग बीमारी में मोटापा, मांसपेशियों एवं हड्डियों की कमजोरी, शरीर में दर्द, पेट में धारियां, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

24 वर्षीय युवक वजन बढ़ने, थकान, पीठ दर्द और चलने में कमजोरी की शिकायत के साथ एंडोक्रिनोलॉजी ओपीडी पहुंचा। प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष मधुकर मित्तल के नेतृत्व में टीम ने जांच की, जिसमें सीरम कोर्टिसोल और ACTH हार्मोन का उच्च स्तर पाया गया। एमआरआई में ट्यूमर की पुष्टि होने पर सर्जरी का निर्णय लिया गया। एंडोक्राइन टीम में मेडिसिन विभाग के जूनियर रेजिडेंट डॉ. हरेंद्र और डॉ. शक्ति शामिल थे।

सर्जिकल टीम का नेतृत्व न्यूरोसर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुयश सिंह ने किया। उन्होंने ट्यूमर को हटाने के लिए ट्रांसनेजल ट्रांसफेनॉइडल एंडोस्कोपिक तकनीक का प्रयोग किया। मरीज विवेक शुरुआत में व्हीलचेयर पर था, लेकिन सर्जरी के बाद मात्र एक महीने में वह अपने पैरों पर खड़ा होकर चलने लगा।

एम्स रायबरेली एंडोक्राइन विकारों के उन्नत उपचार में लगातार अग्रणी भूमिका निभा रहा है। अत्याधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सक टीमों के सहयोग से संस्थान जटिल हार्मोनल व न्यूरोसर्जिकल रोगों के सफल उपचार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

कार्यकारी निदेशक प्रो. अमिता जैन के नेतृत्व में एंडोक्रिनोलॉजी, न्यूरोसर्जरी और एनेस्थीसिया विभागों का यह संयुक्त प्रयास कुशिंग बीमारी जैसे दुर्लभ व चुनौतीपूर्ण मामलों के इलाज में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

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