मतदाता पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) लोकतान्त्रिक व्यवस्था की रीढ़ है। यह प्रक्रिया न केवल मतदाता सूची को अद्यतन करती है बल्कि चुनावों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करती है। विशेष गहन पुनरीक्षण के माध्यम से नये मतदाताओं को जोड़ा जाता है, त्रुटियों को सुधारा जाता है और मृत/स्थानान्तरित मतदाताओं के नाम हटाये जाते हैं| चुनावों की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूची का अद्यतन अत्यन्त आवश्यक है। यदि मतदाता सूची में त्रुटियाँ हों, तो चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिह्न लग सकता है। इसी कारण निर्वाचन आयोग समय-समय पर विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) कराता है।
भारत का लोकतन्त्र अपनी विशालता और विविधता के कारण विश्व में अद्वितीय है। यहाँ हर नागरिक को मतदान का अधिकार प्राप्त है और यही अधिकार लोकतान्त्रिक व्यवस्था की नींव को मज़बूत करता है। लेकिन यह अधिकार तभी सार्थक होता है जब मतदाता सूची सटीक और अद्यतन हो। मतदाता पुनरीक्षण की आवश्यकता इसलिए भी है क्योंकि हर वर्ष लाखों युवा अठारह वर्ष की आयु पूरी करते हैं और उन्हें लोकतन्त्र में भागीदारी का अवसर मिलना चाहिए। इसके साथ ही कई बार नाम, पता या आयु सम्बन्धी गलतियाँ सूची में रह जाती हैं, जिन्हें सुधारना आवश्यक होता है। साथ ही मृत और स्थानान्तरित व्यक्तियों के नाम हटाना भी आवश्यक है ताकि सूची पारदर्शी और विश्वसनीय बनी रहे।
पुनरीक्षण की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। सबसे पहले ड्राफ्ट रोल प्रकाशित किया जाता है, जिसमें प्रारम्भिक सूची होती है। इसके बाद नागरिकों को दावे और आपत्तियाँ दर्ज करने का अवसर दिया जाता है। नया नाम जोड़ने के लिए फॉर्म 6, नाम हटाने के लिए फॉर्म 7, सुधार के लिए फॉर्म 8 और एनआरआई मतदाताओं के लिए फॉर्म 6ए का उपयोग किया जाता है। बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर सत्यापन करते हैं और अन्त में सभी दावे और आपत्तियों के निपटारे के बाद अन्तिम सूची प्रकाशित की जाती है।
आज की तकनीकी दुनिया में मतदाता पुनरीक्षण की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक आधुनिक हो चुकी है। निर्वाचन आयोग ने वोटर्स सर्विस पोर्टल और मोबाइल ऐप्स की सुविधा दी है| जिससे नागरिक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आधार लिंकिंग से डुप्लीकेट नाम हटाये जा रहे हैं और पहचान सत्यापन में आसानी हो रही है। डिजिटल मतदाता सूची से पारदर्शिता और सुविधा दोनों बढ़ी हैं। यह तकनीकी नवाचार लोकतन्त्र को और अधिक सशक्त बना रही हैं। मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया को निम्नलिखित बिन्दुओं के माध्यम से सरलतापूर्वक समझा जा सकता है|
मतदाता पुनरीक्षण की आवश्यकता:
- नये मतदाता जोड़ना: हर वर्ष लाखों युवा 18 वर्ष की आयु पूरी करते हैं। उन्हें सूची में शामिल करना आवश्यक है।
- त्रुटियों का सुधार: नाम,पता, आयु या लिंग संबंधी गलतियाँ ठीक की जाती हैं।
- स्थानान्तरण/मृत मतदाता हटाना: जो लोग स्थानांतरित हो गए या जिनका निधन हो गया,उनके नाम हटाए जाते हैं।
- पारदर्शिता सुनिश्चित करना: अद्यतन सूची से चुनाव प्रक्रिया पर जनता का विश्वास बढ़ता है।
कानूनी आधार:
- जनप्रतिनिधित्व अधिनियम,1950: मतदाता सूची तैयार करने और संशोधित करने का आधार।
- अनुच्छेद 324,भारतीय संविधान: निर्वाचन आयोग को चुनावों के संचालन और मतदाता सूची के पुनरीक्षण का अधिकार देता है।
- सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश: हाल ही में न्यायालय ने आधार,राशन कार्ड और EPIC को वैध दस्तावेज़ मानने का सुझाव दिया।
पुनरीक्षण की प्रक्रिया: मतदाता पुनरीक्षण कई चरणों में होता है:
- ड्राफ्ट रोल का प्रकाशन: प्रारम्भिक सूची जारी होती है।
- दावे और आपत्तियाँ: नागरिक नये नाम जोड़ने,सुधार करने या आपत्ति दर्ज करने के लिए आवेदन करते हैं।
- फॉर्म्स का उपयोग:
- Form6– नया नाम जोड़ने के लिए।
- Form7– नाम हटाने के लिए।
- Form8– सुधार के लिए।
- Form6A –एनआरआई मतदाताओं के लिए।
- सत्यापन: बूथ लेवल अधिकारी (BLO)घर-घर जाकर सत्यापन करते हैं।
- अन्तिम प्रकाशन: सभी दावे और आपत्तियों के निपटारे के बाद अन्तिम सूची प्रकाशित होती है।
तकनीकी नवाचार:
- Voters’ Service Portal (voters.eci.gov.in):ऑनलाइन पंजीकरण और सुधार की सुविधा।
- मोबाइल ऐप्स: नागरिक अपने मोबाइल से ही आवेदन कर सकते हैं।
- आधार लिंकिंग: डुप्लीकेट नाम हटाने और पहचान सत्यापन में मदद।
- डिजिटल रोल्स: अब मतदाता सूची डिजिटल रूप में उपलब्ध है।
चुनौतियाँ:
- ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी।
- तकनीकी साक्षरता का अभाव: कई लोग ऑनलाइन प्रक्रिया नहीं समझ पाते।
- दस्तावेज़ों की समस्या: गरीब और प्रवासी मजदूरों के पास आवश्यक दस्तावेज़ नहीं होते।
- राजनीतिक दबाव: कभी-कभी स्थानीय स्तर पर दबाव के कारण निष्पक्षता प्रभावित होती है।
सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका: हाल ही में बिहार में SIR पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि आधार, राशन कार्ड और EPIC को वैध दस्तावेज़ माना जा सकता है। इससे प्रक्रिया सरल होगी और अधिक नागरिक सूची में जुड़ सकेंगे।
सामाजिक और राजनीतिक महत्व:
- लोकतान्त्रिक अधिकार का संरक्षण: हर नागरिक को वोट देने का अधिकार मिलता है।
- समानता का आधार: सभी वर्गों को समान अवसर।
- राजनीतिक स्थिरता: अद्यतन सूची से चुनाव परिणामों पर विवाद कम होते हैं।
- जन भागीदारी: नागरिकों की सक्रिय भागीदारी लोकतन्त्र को मजबूत करती है।
सुधार के उपाय:
- जागरूकता अभियान: गाँव-गाँव जाकर लोगों को प्रक्रिया समझाना।
- सरल दस्तावेज़ नीति: न्यूनतम दस्तावेज़ों से पंजीकरण की सुविधा।
- तकनीकी प्रशिक्षण: नागरिकों को ऑनलाइन प्रक्रिया सिखाना।
- निगरानी तन्त्र:BLO और अधिकारियों पर सख्त निगरानी।
निष्कर्ष: मतदाता पुनरीक्षण केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह लोकतन्त्र की आत्मा है। लोकतन्त्र की रीढ़ को मज़बूत करने की कवायद है। अतः हर नागरिक का अधिकार और कर्तव्य है कि वह समय पर अपना नाम सूची में दर्ज कराये| यदि मतदाता सूची सटीक और अद्यतन होगी, तभी चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी होंगे। भारत निर्वाचन आयोग ने तकनीकी नवाचारों और कानूनी प्रावधानों के माध्यम से इस प्रक्रिया को अधिक सशक्त बनाया है। मतदाता पुनरीक्षण को केवल प्रशासनिक कार्य न मानकर लोकतान्त्रिक जिम्मेदारी समझना चाहिए।
डॉ. दीपकुमार शुक्ल
(स्वतन्त्र टिप्पणीकार)





