रायबरेली। जिलाधिकारी हर्षिता माथुर एवं मुख्य विकास अधिकारी अंजूलता के निर्देशानुसार तथा जिला प्रोबेशन अधिकारी जयपाल वर्मा के मार्गदर्शन में महिला कल्याण विभाग की हब फॉर इंपावरमेंट ऑफ वूमेन टीम द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत 100 दिवसीय अभियान के अंतर्गत राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, रायबरेली में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान जिला मिशन कोऑर्डिनेटर शेफाली सिंह ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि बाल विवाह बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास में बाधा उत्पन्न करता है। इससे बालक एवं बालिकाओं का भविष्य प्रभावित होता है और उनका बचपन छिन जाता है। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु में विवाह करने वाली लड़कियों के घरेलू हिंसा का शिकार होने की संभावना अधिक होती है तथा उनके शिक्षा से वंचित रहने की आशंका भी बढ़ जाती है। बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है, जिसमें दोषी पाए जाने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना, दो वर्ष तक का कठोर कारावास अथवा दोनों का प्रावधान है। उन्होंने परिवार, समाज और समुदाय से बाल विवाह रोकने के लिए सक्रिय सहभागिता की अपील की।
जेंडर स्पेशलिस्ट पूजा तिवारी ने बताया कि विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित है। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने बाल विवाह मुक्त भारत बनाने की शपथ ली और अपने परिवार, पड़ोस व समुदाय में बाल विवाह रोकने हेतु प्रयास करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, वन स्टॉप सेंटर, बाल सेवा योजना, स्पॉन्सरशिप योजना, 181 महिला हेल्पलाइन, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना तथा पति की मृत्यु पर निराश्रित महिला पेंशन योजना सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की गई।





