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कोहरे में जानलेवा सफर: हर साल 30 हजार से अधिक सड़क हादसे

नई दिल्ली। भारत कारों से प्यार करता है। हम उन्हें खरीदते हैं, पॉलिश करते हैं, नाम देते हैं, डिलीवरी के समय सेल्फी लेते हैं और सोशल मीडिया पर गर्व से पोस्ट करते हैं। कभी-कभी हम उन्हें हवा की तरह दौड़ाने के सपने भी देखते हैं। लेकिन जैसे ही कार डीलरशिप से बाहर निकलती है, रोमांस खत्म हो जाता है और नियमों की मोटी किताब डैशबोर्ड पर ऐसे गिरती है, मानो किसी झुंड ने विमान से टकरा दिया हो।

कार का मालिक होना जल्द ही उन कानूनों के साथ रस्साकशी बन जाता है, जो न तो चालक पर भरोसा करते हैं और न ही आधुनिक कारों को समझते हैं। ये नियम आधुनिक दुनिया के साथ तालमेल बिठाने में भी रुचि नहीं दिखाते।

आपकी ड्रीम कार में अनुकूली क्रूज़ कंट्रोल, लेन-कीपिंग असिस्ट, पैनोरमिक सनरूफ और अंतरिक्ष यान जैसा डैशबोर्ड हो सकता है। लेकिन ज्यादा चौड़ी पकड़ वाले टायर? संदिग्ध। रंगा हुआ शीशा? वर्जित। रूफ-रैक? बेशर्म उकसावा। दो हॉर्न? दिखावा।
आकांक्षा का स्वागत है, लेकिन स्वायत्तता नहीं। और अगर आप सर्दियों में साफ देखने की कोशिश करते हैं, तो ऐसे हालात के लिए तैयार रहें जो आपकी जेब अंधी कर दें। भारत में अगर आपने हेडलाइट्स को “व्यावहारिक” बनाने की कोशिश की, तो व्यवस्था कहती है—आप नियम तोड़ रहे हैं।

इसी नियम और हकीकत के टकराव का नतीजा हर सर्दी में सड़कों पर दिखता है।

बरेली में बड़ा हादसा
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के फरीदपुर में रविवार सुबह (18.01.2026) लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर घने कोहरे के कारण बड़ा सड़क हादसा हुआ। तीन रोडवेज बसों समेत करीब 20 वाहन आपस में टकरा गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और हाईवे के दोनों ओर लंबा जाम लग गया। दुर्घटना में एक रोडवेज बस चालक की मौत हो गई, जबकि 24 लोग घायल हो गए।

एक्सप्रेसवे पर सिलसिलेवार टक्कर
यह कोई एक घटना नहीं है। दिसंबर में यमुना एक्सप्रेसवे पर घने कोहरे और अपर्याप्त वाहन प्रकाश व्यवस्था के कारण 13 वाहन आपस में टकरा गए। इस हादसे में दो लोगों की मौत हुई और 20 से अधिक लोग घायल हो गए। चालक खतरनाक और अपर्याप्त रोशनी में लड़खड़ाते रहे, कुछ मीटर आगे देखने में भी असमर्थ थे।

इसी सप्ताह एक राष्ट्रीय राजमार्ग पर तड़के सुबह हुए हादसे में पांच कारें आपस में भिड़ गईं। यहां भी कोहरे को प्रमुख कारण बताया गया।

जनवरी 2026 में ही उत्तर प्रदेश में यमुना एक्सप्रेसवे और लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर घने कोहरे के कारण कई वाहन टकराए, जिनमें कुल चार लोगों की मौत और 25 से अधिक लोग घायल हुए।

छोटी सड़कों पर भी वही खतरा
समस्या केवल एक्सप्रेसवे तक सीमित नहीं है। नवंबर में सिलीगुड़ी में कोहरे से जुड़ी एक दुर्घटना में तीन ट्रक और चार कारें शामिल थीं। यात्री घंटों तक फंसे रहे क्योंकि पहले उत्तरदाताओं को लगभग शून्य दृश्यता में घटनास्थल तक पहुंचने में भारी कठिनाई हुई। हाईवे गश्ती अधिकारियों को ड्राइवरों को कई किलोमीटर पीछे तक लौटने के लिए कहना पड़ा। चालक अंधेरे में रेंगते रहे, केवल आगे चल रहे वाहनों की टेललाइट्स की हल्की चमक पर निर्भर रहते हुए, जो सफेद धुंध में कहीं खो जाती थीं।

यह कोई कहानी नहीं, बल्कि एक मौसमी दुःस्वप्न है, जिसे कानून और तर्क अब तक रोकने में असफल रहे हैं।

आंकड़े और हकीकत
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, भारत में हर साल 30,000 से अधिक दुर्घटनाएँ कोहरे से जुड़ी होती हैं। एक्सप्रेसवे पर बहु-वाहन टकराव में अक्सर एक दर्जन से अधिक वाहन शामिल होते हैं। देखने में ये बंपर-कार खेल जैसे लग सकते हैं, लेकिन इनमें असली लोग घायल होते हैं और जान गंवाते हैं।

वैश्विक स्तर पर अनुकूली हेडलाइट्स और उचित फॉग लैंप दुर्घटना जोखिम को 30 प्रतिशत से अधिक कम करते हैं। भारत में इन्हें या तो वैकल्पिक सुविधा माना जाता है या फिर अवैध। नतीजा यह है कि फोरम और सड़कों पर माइग्रेन पैदा करने वाली चकाचौंध, गलत रोशनी और धैर्य खो चुके चालक दिखाई देते हैं, जो ऐसे कोहरे में रेंग रहे होते हैं जिसे आधा काटा जा सकता है।

काफ्का जैसी ड्राइविंग
भारत में शीतकालीन ड्राइविंग एक काफ्काई अनुभव बन चुकी है। धीरे चलो तो पीछे से टेलगेटर्स परेशान करते हैं। अपग्रेड करो तो चालान का खतरा। कुछ मत करो तो मौत से जुआ। सलाह दी जाती है—‘उचित फॉग लैंप का उपयोग करें’, लेकिन साथ ही ‘अवैध मॉडिफिकेशन’ पर सख्ती भी की जाती है। सार्वजनिक सुरक्षा के नाम पर यह आत्म-विरोधाभास हर सर्दियों की सुबह सड़कों पर उतर आता है।

फैक्ट्री हेडलाइट्स अक्सर मंद साबित होती हैं, फॉग लैंप अपग्रेड प्रतिबंधित हैं और चालक हताशा में गलत समाधान अपनाते हैं। कानून जिम्मेदार नवाचार को प्रोत्साहित करने के बजाय उसे दुरुपयोग मान लेता है और सुरक्षा बढ़ाने की कोशिश कर रहे ड्राइवरों को दंडित करता है।

नतीजे हर साल सामने हैं
हर सर्दी में वही तस्वीर—बहु-कार टक्कर से जाम, देरी से पहुंचती एम्बुलेंस, फंसे हुए चालक, रास्ते में अटके परिवार और बदली हुई जिंदगियां।

NHAI की एडवाइजरी
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने कोहरे में वाहन चलाने को लेकर सावधानियां जारी की हैं:

  • घने कोहरे में गति 30 किमी/घंटा से कम रखें।
  • फॉग लाइट और हैजर्ड लाइट (डिपर) का सही उपयोग करें।
  • आगे चल रहे वाहन से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।

कोहरा हर साल आता है, हादसे भी आते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि सुर्खियां बदल जाती हैं, लेकिन नियम और ज़मीनी हकीकत के बीच की दूरी जस की तस बनी रहती है। ➥ Pic & story by Kamal Nain Narang

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