रायबरेली। ग्लूकोमा जागरूकता माह के अवसर पर एम्स रायबरेली के नेत्र रोग विभाग द्वारा सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की थीम “साइलेंट थीफ ऑफ साइट: नो ग्लूकोमा, सेव विज़न” रही। यह शैक्षणिक कार्यक्रम नेत्र रोग विभाग के सेमिनार कक्ष, वार्ड 7C में संपन्न हुआ।
यह सीएमई कार्यक्रम प्रो. (डॉ.) अमिता जैन, कार्यकारी निदेशक, एम्स रायबरेली के संरक्षण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कर्नल अखिलेश सिंह (उप निदेशक–प्रशासन), डॉ. अर्चना वर्मा (डीन–रिसर्च), कर्नल यू. एन. राय (वित्त सलाहकार) सहित एम्स रायबरेली के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संकाय सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. एस. के. भास्कर, प्रोफेसर, नेत्र रोग विभाग, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ रहे। सभी अतिथियों ने सीएमई के सफल आयोजन की सराहना करते हुए ग्लूकोमा जैसी दृष्टिहीनता उत्पन्न करने वाली बीमारी की रोकथाम हेतु जागरूकता एवं शैक्षणिक गतिविधियों के महत्व पर बल दिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्लूकोमा के शीघ्र निदान एवं समय पर उपचार के प्रति जागरूकता बढ़ाना था, जो विश्वभर में अपरिवर्तनीय अंधत्व के प्रमुख कारणों में से एक है।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. श्रृंखल द्वारा स्वागत संबोधन एवं विषय परिचय के साथ हुई। इसके पश्चात आयोजन अध्यक्ष एवं डीन (परीक्षा) प्रो. (डॉ.) प्रगति गर्ग ने “अर्ली ग्लूकोमा, अर्ली एक्शन: चेंजिंग द नैचुरल हिस्ट्री” विषय पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया।
अंतिम वैज्ञानिक सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. एस. के. भास्कर ने “ग्लूकोमा में अंतःनेत्र दाब एवं अन्य दाब” विषय पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम का समापन डॉ. रुचि शुक्ला द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया। इस सीएमई कार्यक्रम में फैकल्टी सदस्यों, रेज़िडेंट डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।





