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कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम

➯ बोले कृषि वैज्ञानिक, प्राकृतिक खेती से बढ़ेगी किसानों की आमदनी
विश्व बंधु शास्त्री: बागपत। जनपद में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र में एक दिवसीय व्यवहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती से होने वाले नुकसान और प्राकृतिक खेती के दीर्घकालिक लाभों से अवगत कराना रहा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिक डॉ. विवेक राज, डॉ. राजेश कुमार और डॉ. सूरजभान यादव ने किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि प्राकृतिक खेती से भूमि की उर्वरता बनी रहती है, उत्पादन लागत में कमी आती है और फसलों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होता है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

कार्यक्रम में किसानों को जीवामृत, घन जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और दशपर्णी अर्क बनाने की विधियों का व्यवहारिक प्रदर्शन भी कराया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक खेती मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाती है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि, जल और वायु प्रदूषित हो रहे हैं, जबकि प्राकृतिक खेती इन समस्याओं का स्थायी समाधान प्रदान करती है।

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की कि वे चरणबद्ध तरीके से रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती को अपनाएं। इससे कम लागत में बेहतर उत्पादन संभव है और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण मिल सकेगा।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष किसानों ने भाग लिया। किसानों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्र प्रभारी डॉ. लक्ष्मीकांत ने की, जबकि संचालन कृषि वैज्ञानिक डॉ. शिवम सिंह द्वारा किया गया।

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