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एम्स रायबरेली में पहली बार ‘जेली बेली’ की जटिल सर्जरी और HIPEC सफल

रायबरेली। AIIMS Raebareli के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए स्यूडोमिक्सोमा पेरिटोनाई (PMP), जिसे आम भाषा में ‘जेली बेली’ कहा जाता है, के एक अत्यंत जटिल और दुर्लभ मामले का सफल उपचार किया है। यह पहली बार है जब रायबरेली और आसपास के क्षेत्र में इस स्तर की उन्नत तकनीक का उपयोग किया गया है।

इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अविनाश चंद्र सिंह ने किया, जबकि उनकी टीम में सीनियर रेजिडेंट्स डॉ. अक्षय और डॉ. अनुष्का शामिल रहीं। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. अभय राज यादव और डॉ. प्रवीण का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस उपलब्धि में संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) अमिता जैन का मार्गदर्शन भी अहम रहा।

सर्जरी के दौरान व्यापक साइटोरिडक्टिव सर्जरी (CRS) की गई, जिसमें टोटल पेरिटोनेक्टोमी, राइट हेमीकोलेक्टोमी और मल्टीविसेरल रिसेक्शन जैसी जटिल प्रक्रियाएं शामिल थीं। इसके बाद एडवांस्ड HIPEC तकनीक का उपयोग करते हुए 41-43 डिग्री सेल्सियस तापमान पर माइटोमाइसिन-सी के साथ हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी दी गई।

ऑपरेशन के बाद मरीज को तीव्र किडनी चोट (AKI) और एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS) जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा। हालांकि, मल्टीडिसिप्लिनरी आईसीयू और सर्जिकल टीम की निरंतर निगरानी और समर्पण के चलते मरीज ने सफलतापूर्वक इन चुनौतियों को पार कर लिया।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मरीज अब पूरी तरह स्थिर है और ऑपरेशन के 13वें दिन उसे सुरक्षित रूप से डिस्चार्ज कर दिया गया। यह सफलता आधुनिक कैंसर उपचार, उन्नत तकनीक और टीम वर्क का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है।

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