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एम्स रायबरेली में 20 वर्ष से किडनी पथरी से पीड़ित मरीज का दुर्लभ लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से सफल उपचार

रायबरेली। एम्स रायबरेली के यूरोलॉजी विभाग में लंबे समय से किडनी स्टोन से पीड़ित एक जटिल मरीज का सफलतापूर्वक उपचार किया गया। मरीज बार-बार पथरी बनने और मूत्रवाहिनी में जटिलताओं के कारण पिछले कई वर्षों से विभिन्न उपचार पद्धतियों से गुजर रहा था। जानकारी के अनुसार मरीज का पूर्व में प्रयागराज में ESWL पद्धति से दो बार उपचार किया गया था, जिससे अस्थायी राहत मिली थी। वर्ष 2023 में पुनः अल्ट्रासाउंड जांच में कई पथरियों की पुष्टि हुई, जिसके बाद मरीज ने आयुर्वेदिक उपचार भी लिया। वर्ष 2024 में समस्या बढ़ने पर URSL सर्जरी की सलाह दी गई, लेकिन यह प्रक्रिया नहीं हो सकी। इसके बाद भी मरीज ने विभिन्न स्तरों पर उपचार जारी रखा।

नवंबर 2024 में दर्द बढ़ने पर मरीज का पुनः ESWL एवं स्टेंटिंग प्रक्रिया के माध्यम से उपचार किया गया, लेकिन बार-बार उपचार और स्टेंट बदलने की आवश्यकता के कारण मरीज स्थायी समाधान की तलाश में एम्स रायबरेली पहुंचा। विस्तृत जांच के बाद एम्स रायबरेली के यूरोलॉजिस्ट डॉ. अमित मिश्रा ने पाया कि बार-बार संक्रमण और पथरी बनने के कारण मूत्रवाहिनी में संकुचन (यूरेटरल स्ट्रिक्चर) विकसित हो गया था, जिससे मूत्र प्रवाह बाधित हो रहा था और किडनी पर दबाव बढ़ रहा था।

स्थिति को देखते हुए लैप्रोस्कोपिक यूरेटेरो-यूरेटेरोस्टॉमी सर्जरी का निर्णय लिया गया, जिसमें मूत्रवाहिनी के संकुचित भाग को हटाकर दोनों स्वस्थ सिरों को पुनः जोड़ा गया। यह सर्जरी लगभग 6 मिमी व्यास की मूत्रवाहिनी में लैप्रोस्कोपिक तकनीक से सफलतापूर्वक की गई। डॉक्टरों के अनुसार इस तकनीक से मरीज को न्यूनतम चीरे, कम दर्द और शीघ्र स्वस्थ होने का लाभ मिला। साथ ही बार-बार स्टेंटिंग और लिथोट्रिप्सी की आवश्यकता भी समाप्त हो गई। पूर्व में उपचार में देरी के कारण मरीज की दोनों किडनियों पर असर पड़ा था, जिसमें दाईं किडनी लगभग 70 प्रतिशत और बाईं किडनी लगभग 40 प्रतिशत प्रभावित हुई थी।

सर्जरी टीम में डॉ. अमित मिश्रा (यूरोलॉजिस्ट), डॉ. अभय राज (एनेस्थेटिस्ट), डॉ. उत्सव, डॉ. मयंक (जूनियर रेजिडेंट), ओटी नर्सिंग स्टाफ कृष्णा एवं जयपाल तथा ओटी टेक्नीशियन लक्ष्मी शामिल रहे। ऑपरेशन के बाद देखभाल नर्सिंग अधिकारी नम्रता, सुमंत, एकता सहित अन्य स्टाफ द्वारा की गई। वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और नियमित फॉलोअप में है। विभाग ने इस सफलता का श्रेय एम्स रायबरेली की कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. अमिता जैन के मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन को दिया है।

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