रायबरेली। एम्स रायबरेली के माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा 24 मार्च 2026 को विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह दिवस वर्ष 1882 में डॉ. रॉबर्ट कोच द्वारा माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस की खोज की स्मृति में मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम “हाँ! हम टीबी को खत्म कर सकते हैं” रही।
कार्यक्रम का उद्घाटन कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) अमिता जैन ने किया। इस अवसर पर डीन अकादमिक प्रो. (डॉ.) नीरज कुमारी, वित्तीय सलाहकार कर्नल यू.एन. राय, अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरज कुमार श्रीवास्तव, डॉ. सना इस्लाही, डॉ. प्रमोद कुमार तथा डॉ. श्वेता सिंह सहित रेजीडेंट डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, मरीज एवं उनके तीमारदार उपस्थित रहे।
प्रो. (डॉ.) अमिता जैन ने अपने संबोधन में टीबी नियंत्रण के लिए शीघ्र जांच, समय पर उपचार और जनजागरूकता के महत्व पर जोर दिया। कार्यक्रम में आयोजित वैज्ञानिक सत्रों में टीबी निदान में नई प्रगति, नमूना संग्रह, दवा-प्रतिरोधी टीबी की पहचान तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन के अद्यतन दिशा-निर्देशों पर विस्तार से चर्चा की गई।
आउटरीच कार्यक्रम के अंतर्गत सामुदायिक चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा ओल्ड ओपीडी परिसर में नुक्कड़ नाटक और स्वास्थ्य वार्ता के माध्यम से मरीजों को टीबी के लक्षण, बचाव और उपचार की जानकारी दी गई। विभागाध्यक्ष डॉ. भोला नाथ ने लोगों से संवाद कर टीबी की शीघ्र पहचान और पूर्ण उपचार पर बल दिया।
इसके अलावा दरियापुर गांव में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें ग्राम प्रधान, स्वास्थ्यकर्मी, आशा कार्यकर्ता, शिक्षक और ग्रामीणों ने भाग लिया। इस दौरान सामुदायिक सहभागिता, समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करने पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में डॉ. नीरज पवार ने टीबी नियंत्रण में पोषण के महत्व को रेखांकित करते हुए सभी से जागरूकता और उन्मूलन अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की।





