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कौशल विकास और पारंपरिक शिल्प से महिला सशक्तिकरण को नई दिशा

रायबरेली। एनटीपीसी द्वारा कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के अंतर्गत समाज के समग्र विकास के लिए बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं। विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं के कौशल विकास, रोजगार सृजन और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर कंपनी का विशेष फोकस है। कंपनी अधिनियम, 2013 की अनुसूची VII के अनुरूप एनटीपीसी लगातार व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर और रोजगारपरक बनाने की दिशा में कार्यरत है।

ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को संसाधनों, प्रशिक्षण और बाजार तक सीमित पहुंच के कारण कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए एनटीपीसी ऊंचाहार ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए ठोस कदम उठाए हैं। इस पहल के तहत महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण के साथ-साथ उत्पाद विकास, विपणन और उद्यमिता की जानकारी भी दी गई, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।

इसी क्रम में मूंज शिल्प के पुनर्जीवन और संवर्धन को विशेष महत्व दिया गया है। मूंज एक प्राकृतिक घास है, जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। स्थानीय स्तर पर वर्षों से इससे उपयोगी और सजावटी वस्तुएं बनाई जाती रही हैं। एनटीपीसी ऊंचाहार की इस पहल के तहत पुरवारा गांव की 30 से अधिक महिलाओं को मूंज शिल्प का व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में कच्चे माल का चयन, डिजाइन विकास, उत्पाद निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण और फिनिशिंग जैसी तकनीकों की जानकारी दी गई। इसके परिणामस्वरूप महिलाएं कुशल कारीगर बनने के साथ-साथ आत्मविश्वासी और उद्यमशील भी बनीं।

प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं ने पेन होल्डर, टोकरी, पूजा टोकरी, कोस्टर, दीवार सजावट सामग्री और टेबल रनर जैसे आकर्षक उत्पाद तैयार किए, जिन्हें विभिन्न मेलों और प्रदर्शनियों में प्रदर्शित और विक्रय किया गया। इससे उन्हें आय के नए अवसर प्राप्त हुए और उनके कार्य को पहचान मिली। इस पहल की झलक प्रियदर्शिनी लेडीज़ क्लब, एनटीपीसी ऊंचाहार द्वारा आयोजित किशोरी मेले में भी देखने को मिली, जहां महिलाओं ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया और सीधे ग्राहकों से संवाद स्थापित किया। इसके अलावा महिलाओं को स्व-सहायता समूहों (SHGs) के रूप में संगठित कर सामूहिक उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। वित्तीय साक्षरता और बाजार से जुड़ाव के प्रयासों ने इस पहल को और प्रभावी बनाया है।

एनटीपीसी ऊंचाहार की यह पहल न केवल पारंपरिक शिल्प के संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि महिला सशक्तिकरण, सतत आजीविका और समावेशी विकास की दिशा में एक प्रेरणादायक मॉडल भी प्रस्तुत करती है।

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